नन्हे वैज्ञानिकों ने नवाचार और सतत विकास का दिखाया दम
खगड़िया: डायट (DIET) संसारपुर, खगड़िया के प्रांगण में आयोजित 32वीं राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 का दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यक्रम सोमवार को उत्साह और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए बाल वैज्ञानिकों ने न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए नवाचार और सतत विकास के नए आयाम भी तलाशे।
विज्ञान और नवाचार का संगम
दो दिवसीय इस महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर वैज्ञानिक सोच को विकसित करना और उन्हें शोध के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों ने छात्रों को विज्ञान एवं नवाचार, परियोजना निर्माण (Project Formulation) और सतत विकास (Sustainable Development) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मार्गदर्शन दिया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि नवाचार का अर्थ केवल नई तकनीक बनाना नहीं है, बल्कि अपनी स्थानीय समस्याओं का सरल और प्रभावी समाधान ढूंढना भी है।
प्रशिक्षण सत्रों में विशेषज्ञों ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने, आंकड़ों का संकलन करने और उसे प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की बारीकियों को समझाया। छात्रों को 'लर्निंग बाय डूइंग' (करके सीखने) की पद्धति पर जोर देने की सलाह दी गई, ताकि वे विज्ञान के सिद्धांतों को वास्तविक जीवन से जोड़ सकें।
डॉ. चन्द्रहास भारती की विशेष परियोजना: 'फास्ट फूड और स्वास्थ्य'
इस आयोजन के दौरान सबसे अधिक चर्चा का विषय डॉ. चन्द्रहास भारती द्वारा प्रस्तुत 'मॉडल परियोजना' रही। उन्होंने 'फास्ट फूड का विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रभाव' विषय पर एक अत्यंत प्रासंगिक शोध प्रस्तुत किया। अपने मॉडल के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान पीढ़ी के खान-पान की आदतें किस प्रकार उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं।
डॉ. भारती ने अपने आंकड़ों के माध्यम से दिखाया कि कैसे जंक फूड का अत्यधिक सेवन छात्रों की एकाग्रता, पोषण स्तर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे पौष्टिक और पारंपरिक आहार की ओर लौटें। उनकी इस परियोजना को उपस्थित शिक्षकों और निर्णायकों ने काफी सराहा और इसे छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन प्रयास माना।
बाल विज्ञान कांग्रेस के इस मंच पर छात्रों ने सतत विकास पर भी अपनी परियोजनाओं को रखा। किसी ने जल संरक्षण पर मॉडल बनाया, तो किसी ने सौर ऊर्जा के उपयोग को लेकर नवाचार पेश किए। प्रतिभागियों का मानना था कि यदि आज के विद्यार्थी पर्यावरण के प्रति जागरूक रहेंगे, तभी भविष्य का भारत सुरक्षित और विकसित हो पाएगा।
प्रतिभागियों का उत्साह और शिक्षकों का मार्गदर्शन
समापन समारोह में खगड़िया के डायट प्राचार्य ने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि चरित्र निर्माण में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा, "खगड़िया में आए ये नन्हे वैज्ञानिक आने वाले समय में देश के बड़े शोधकर्ता और आविष्कारक बनेंगे।"
कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बाल वैज्ञानिकों को पुरस्कृत किया गया और सभी ने एक-दूसरे से सीखने और साथ मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। खगड़िया में संपन्न हुआ यह आयोजन न केवल विज्ञान की प्रगति का प्रतीक बना, बल्कि भावी पीढ़ी को एक दिशा भी प्रदान की।