शेड का निर्माण अधूरा, धूप और बारिश में मरीजों की जान पर बन आई

भागलपुर: जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जेएलएनएमसीएच), जिसे स्थानीय लोग 'मायागंज अस्पताल' के नाम से जानते हैं, की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पताल के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के 'फैब्रिकेटेड वार्ड' के बाहर निर्माणाधीन शेड लंबे समय से अधूरा पड़ा है। इस अधूरी निर्माण परियोजना के कारण अस्पताल की बदहाली का खामियाजा उन मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है, जो पहले ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

बेहाल मरीज, और ऊपर से मौसम की मार

अस्पताल परिसर में एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक जाने के लिए कोई सुरक्षित और ढका हुआ रास्ता (कॉरिडोर) नहीं है। इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड के बाहर प्रस्तावित शेड का काम महीनों से ठप पड़ा है, जिसके लोहे के खंभे अब जंग खा रहे हैं। स्थिति यह है कि जब भी मरीज को स्ट्रेचर पर या व्हीलचेयर से एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जांच या उपचार के लिए ले जाया जाता है, तो उन्हें खुले आसमान के नीचे से गुजरना पड़ता है।

सोमवार को हुई झमाझम बारिश के दौरान यह समस्या और भी गंभीर हो गई। मरीजों को बारिश से बचाने का कोई साधन न होने के कारण, परिजनों को प्लास्टिक की पन्नियों या चादरों का सहारा लेना पड़ा। भीषण गर्मी में झुलसा देने वाली धूप और बारिश में भीगने के कारण मरीजों की स्थिति और बिगड़ने का डर बना रहता है। कई बार स्ट्रेचर ले जाने वाले कर्मी भी फिसलन के कारण हादसे का शिकार होते-होते बचते हैं।

परिजनों का छलका दर्द

मरीजों के साथ आए परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को मरीजों की सुविधा से कोई लेना-देना नहीं है। एक मरीज के परिजन ने बताया, “हमें डॉक्टर ने दूसरे विभाग में जांच के लिए भेजा था। बाहर इतनी तेज बारिश थी कि मरीज को भीगने से बचाने के चक्कर में हम खुद भीगे और मरीज की तबीयत और खराब हो गई। यदि शेड पूरा बना होता तो हमें यह मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती।”

अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, शेड निर्माण का कार्य प्रशासनिक उदासीनता और ठेकेदार की लापरवाही के कारण लटका हुआ है। कई बार अस्पताल प्रबंधन को इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक इसे पूरा करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। आलम यह है कि निर्माण कार्य के नाम पर केवल लोहे का ढांचा खड़ा कर छोड़ दिया गया है, जो अब सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक साबित हो सकता है।

प्रशासन का रुख

इस मामले पर अस्पताल के उपाधीक्षक ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को जल्द ही दूर किया जाएगा। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब मायागंज अस्पताल के निर्माण कार्यों में देरी और अव्यवस्था पर सवाल उठे हों। मरीजों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरा किया जाए ताकि आने वाले समय में मरीजों को इस तरह की असुविधा न हो।

मायागंज अस्पताल, जो पूरे भागलपुर संभाग का सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल है, वहां की यह बदहाली प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या अब भी प्रशासन अपनी नींद से जागेगा?