गजल संग्रह 'एक कौर' का भव्य लोकार्पण, 60 कवियों ने बिखेरे शब्द के जादू

सुल्तानगंज (भागलपुर): सुल्तानगंज स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम का प्रांगण रविवार को साहित्य की सुगंध से सराबोर रहा। अवसर था हिंदी गजल संग्रह 'एक कौर' के भव्य लोकार्पण समारोह का। इस साहित्यिक आयोजन में न केवल पुस्तक का विमोचन हुआ, बल्कि एक विशाल कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न कोनों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

'एक कौर' का लोकार्पण

समारोह का मुख्य आकर्षण हिंदी गजल संग्रह 'एक कौर' का लोकार्पण रहा। इस पुस्तक को विद्वानों और साहित्य प्रेमियों ने हिंदी साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुधीर कुमार और विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. अमरकांत सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।

अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि 'एक कौर' जैसे गजल संग्रह का आना इस बात का प्रमाण है कि आज भी हिंदी साहित्य की धारा अत्यंत समृद्ध है और नई पीढ़ी गजल जैसी कठिन विधा में भी अपनी गहरी छाप छोड़ रही है। डॉ. शिवनारायण सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी गजल संग्रह की सराहना करते हुए कहा कि इसमें संकलित गजलें आम आदमी के जीवन संघर्ष और संवेदनाओं को गहराई से छूती हैं।

साहित्यकारों का समागम

इस आयोजन की विशेषता इसकी व्यापकता रही। इसमें बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित देश के कई जिलों से साहित्यकार और कवि शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन तीन सत्रों में किया गया, जिससे यह आयोजन और भी व्यवस्थित और प्रभावी रहा। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता अनिरुद्ध प्रभाष ने की, जिसमें अंगिका साहित्य की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।

60 कवियों की महफिल

कार्यक्रम के तीसरे सत्र में 'मुक्तक कवि सम्मेलन' का आयोजन हुआ, जो पूरी रात चर्चा का विषय बना रहा। इस मंच पर लगभग 60 कवियों ने शिरकत की। कवियों ने जब अपनी लेखनी से श्रृंगार, वीर रस और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कवि सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ और युवा रचनाकारों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। जहां एक ओर अनुभवी कवियों ने अपनी परिपक्व रचनाओं से महफिल में गहराई भरी, वहीं युवा कवियों ने समकालीन विषयों पर अपनी नई दृष्टि प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

सांस्कृतिक और साहित्यिक चेतना का संचार

महर्षि मेंहीं आश्रम जैसे पावन स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम ने सुल्तानगंज के साहित्यिक पटल को एक नई पहचान दी है। स्थानीय लोगों के लिए यह एक यादगार साहित्यिक उत्सव रहा। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि सुल्तानगंज में साहित्यिक गतिविधियों के लिए एक उर्वरा भूमि है और ऐसे आयोजनों से समाज में रचनात्मक चेतना का संचार होता है।