निर्माणाधीन फोरलेन पर हादसों का तांडव, उद्घाटन से पहले ही जा रही लोगों की जान
सुल्तानगंज/भागलपुर: भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में निर्माणाधीन मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन सड़क मौत का जाल बनती जा रही है। अभी इस सड़क का निर्माण कार्य अधूरा है और उद्घाटन भी नहीं हुआ है, लेकिन इस पर भारी वाहनों का बेखौफ आवागमन शुरू हो गया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और ट्रैफिक अनुशासन की कमी के कारण यहाँ आए दिन भीषण सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।
मिरहट्टी में दो घंटे में चार मौतें
हालिया घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार रात सुल्तानगंज के मिरहट्टी गांव के पास महज दो घंटे के अंतराल पर दो भीषण दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें चार लोगों की जान चली गई। पहली घटना में तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार तीन दोस्तों को रौंद दिया। इसके ठीक डेढ़ घंटे बाद, उसी स्थान पर दो ट्रक आमने-सामने टकरा गए, जिसमें दोनों चालकों की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक ट्रक रॉन्ग साइड से आ रहा था, जो इस हादसे का मुख्य कारण बना।
अनियंत्रित निर्माण और तकनीकी खामियां
फोरलेन के निर्माणाधीन होने के बावजूद उस पर भारी ट्रकों और डंपरों का परिचालन बिना किसी सुरक्षा संकेत (Signage) के हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाईवे पर जगह-जगह 'अवैध कट' बनाए गए हैं, जो मुख्य सड़क को नीचे की पीसीसी सड़कों से जोड़ते हैं। ये कट निर्माण कार्यों की सुगमता के लिए थे या स्थानीय लोगों ने अपनी सहूलियत के लिए बना लिए, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन ये मौत का कारण जरूर बन रहे हैं।
इसके अलावा, हाईवे के किनारे बिना किसी रिफ्लेक्टर या इंडिकेटर के भारी वाहनों को खड़ा कर दिया जाता है, जो रात के अंधेरे में दुर्घटनाओं को आमंत्रण देते हैं। बाहर से आने वाले ट्रक चालकों को फोरलेन की दिशा और रूट की सही जानकारी नहीं होती, जिससे वे अक्सर गलत दिशा में वाहन ले आते हैं।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
यद्यपि यातायात पुलिस द्वारा हाईवे पर 'स्पीड रडार गन' का उपयोग किया जाता है, लेकिन यह केवल जुर्माना वसूलने तक सीमित है। दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है। हाईवे पर न तो पर्याप्त गति सीमा के संकेतक लगे हैं और न ही वाहनों के ओवरटेक करने की प्रवृति पर कोई लगाम है।
पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। ढाई माह पूर्व यात्रियों से भरी एक ऑटो को ट्रक ने रौंद दिया था, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा भी नवगछिया-बिहपुर मार्ग सहित आसपास के इलाकों में आए दिन होने वाली घटनाएं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
सुरक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द 'रोको-टोको' अभियान चलाना चाहिए और खतरनाक मोड़ों व अवैध कटों को बंद करना चाहिए। निर्माणाधीन होने के बावजूद वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण यदि सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह 'ड्रीम प्रोजेक्ट' आम जनता के लिए काल साबित होता रहेगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये मौतें कब रुकेंगी?