आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से ग्रीष्मकालीन गुप्त नवरात्र शुरू, 15 जुलाई से कलश स्थापना; 10 दिनों तक होगी शक्ति साधना और पूजा-अर्चना
धार्मिक डेस्क।
आगामी 15 जुलाई (बुधवार) से ग्रीष्मकालीन गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो रही है। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा के शुभ अवसर पर इस बार पुष्य नक्षत्र, हर्षण योग और सिद्ध योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसी शुभ मुहूर्त में श्रद्धालु कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना आरंभ करेंगे।
कलश स्थापना के साथ शुरू होगी पूजा
नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालु कलश स्थापना कर माता के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों और घरों में विशेष पूजा विधि के साथ गुप्त नवरात्र का शुभारंभ होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्र में की गई साधना विशेष फलदायी मानी जाती है और यह साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवधि होती है।
10 दिनों तक शक्ति साधना का पर्व
गुप्त नवरात्र के दौरान 10 दिनों तक माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाएगी। श्रद्धालु इस अवधि में निराहार या फलाहार रहकर माता की आराधना करते हैं और शक्ति साधना में लीन रहते हैं।
घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ, मंत्र-जाप और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहेगा।
वर्ष में दो बार आता है गुप्त नवरात्र
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष में कुल दो बार गुप्त नवरात्र का आयोजन होता है। पहला नवरात्र माघ माह में और दूसरा आषाढ़ माह में पड़ता है।
गुप्त नवरात्र को सामान्य नवरात्र से अधिक रहस्यमय और साधना प्रधान माना जाता है, जिसमें विशेष रूप से तांत्रिक साधनाओं और गुप्त उपासना का महत्व बताया गया है।
तंत्र साधना का विशेष महत्व
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना की प्रधानता होती है। इस अवधि में साधक गहन साधना और ध्यान के माध्यम से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
हालांकि आम श्रद्धालु भी इस दौरान मां दुर्गा की भक्ति और पूजा में शामिल होकर पुण्य अर्जित करते हैं।
भक्तों में उत्साह का माहौल
नवरात्र की शुरुआत को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं और पूजा सामग्री की खरीदारी भी तेज हो गई है।
कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी योजना बनाई जा रही है।
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला गुप्त नवरात्र श्रद्धा और साधना का विशेष पर्व माना जाता है। 10 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा कर भक्त आध्यात्मिक शक्ति और आशीर्वाद की प्राप्ति की कामना करते हैं।