बिहार में 250 मीटर से लंबे पुलों पर लगेगा टोल टैक्स, सरकार ने शुरू किया सर्वे; हर पुल का हो रहा विस्तृत अध्ययन
पटना न्यूज।
बिहार में अब 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों पर टोल टैक्स वसूली की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में प्रारंभिक सर्वे का कार्य शुरू कर दिया है। विभागीय जानकारी के अनुसार, पूरे राज्य में ऐसे सभी पुलों की पहचान और उनका तकनीकी एवं आर्थिक अध्ययन किया जा रहा है, जिन पर भविष्य में टोल वसूली लागू की जा सकती है।
इस फैसले को राज्य के बुनियादी ढांचे के रखरखाव और राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हर पुल का हो रहा विस्तृत अध्ययन
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में मौजूद सभी प्रमुख पुलों का अलग-अलग स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि पुल की लंबाई कितनी है, उसकी निर्माण लागत क्या है और उस पर यातायात का दबाव कितना है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि केवल उन्हीं पुलों को टोल दायरे में शामिल किया जाएगा जो तय मानकों को पूरा करते हैं और जिनकी लंबाई 250 मीटर से अधिक है।
सर्वे में इन मानकों पर हो रहा काम
विभागीय स्तर पर किए जा रहे सर्वे में कई तकनीकी पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। इनमें पुल की संरचना, रखरखाव लागत, दैनिक यातायात, और वैकल्पिक मार्गों की उपलब्धता जैसे बिंदु शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टोल व्यवस्था लागू करने से आम जनता पर अनावश्यक बोझ न पड़े, बल्कि इसका उपयोग सड़क और पुलों के रखरखाव में किया जा सके।
राजस्व बढ़ाने और रखरखाव पर फोकस
सरकार का मानना है कि इस पहल से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और साथ ही पुलों के रखरखाव के लिए स्थायी संसाधन उपलब्ध होंगे। लंबे पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण रखरखाव की लागत अधिक होती है, जिसे टोल सिस्टम के माध्यम से संतुलित करने की योजना है।
जल्द तैयार होगी रिपोर्ट
विभागीय सूत्रों के अनुसार, सर्वे पूरा होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे सरकार के समक्ष रखा जाएगा। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन-किन पुलों पर टोल टैक्स लागू किया जाएगा और किस मॉडल के तहत इसकी वसूली होगी।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
लोगों पर असर और चर्चा
इस फैसले को लेकर आम लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे विकास कार्यों के लिए संसाधन बढ़ेंगे, जबकि कुछ लोग इसे अतिरिक्त आर्थिक बोझ के रूप में देख रहे हैं।
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टोल व्यवस्था पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से लागू की जाती है तो इससे सड़क और पुलों की गुणवत्ता बेहतर बनी रह सकती है।
बिहार सरकार की यह नई पहल राज्य में बुनियादी ढांचे के प्रबंधन और राजस्व संग्रह की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 250 मीटर से लंबे पुलों पर टोल टैक्स लागू करने की योजना से पहले विस्तृत सर्वे किया जा रहा है, ताकि एक संतुलित और व्यावहारिक नीति तैयार की जा सके।