कहलगांव: नशा मुक्त समाज के संकल्प के साथ मनाया गया 'विश्व नशा निषेध दिवस', व्यवहार न्यायालय में हुआ जागरूकता शिविर
कहलगांव (भागलपुर): 'विश्व नशा निषेध दिवस' के अवसर पर कहलगांव व्यवहार न्यायालय परिसर में एक भव्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना और एक नशा मुक्त स्वस्थ वातावरण का निर्माण करना था। अनुमंडल विधिक सेवा प्राधिकार (Sub-Divisional Legal Services Authority) के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और समाज के प्रबुद्ध वर्गों ने एक स्वर में नशे को 'ना' और जीवन को 'हाँ' कहने का संकल्प लिया।
नशा मुक्ति का सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुमंडल विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने की। शिविर के दौरान उपस्थित सभी लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नशा न केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य को बर्बाद करता है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज के लिए अभिशाप है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कानूनी जागरूकता ही एकमात्र माध्यम है जिससे हम नई पीढ़ी को इस दलदल में फंसने से बचा सकते हैं।
इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं और कोर्ट के कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से शपथ ली। सभी ने प्रतिज्ञा की कि वे न केवल स्वयं नशे से दूर रहेंगे, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे और समाज को नशा मुक्त बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
नशे के खिलाफ विधिक दृष्टिकोण
शिविर में उपस्थित वक्ताओं ने नशे से जुड़ी कानूनी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। पैनल अधिवक्ताओं ने बताया कि नशीले पदार्थों का सेवन और व्यापार न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह कानूनन एक गंभीर अपराध भी है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।
अखिलेश कुमार ने कहा, "विधिक सेवा प्राधिकार का यह प्रयास है कि आम नागरिकों तक यह संदेश पहुँचे कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्याओं की शुरुआत है। हमें अपने न्यायालय परिसर से इस अभियान की शुरुआत कर इसे सुदूर गांवों तक ले जाना होगा।"
जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा साधन
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने माना कि नशाखोरी की लत विशेषकर युवाओं में तेजी से बढ़ रही है, जिसका बड़ा कारण जागरूकता का अभाव है। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का नियमित आयोजन होना चाहिए। व्यवहार न्यायालय परिसर में लगे इस शिविर में बड़ी संख्या में वादकारियों ने भी हिस्सा लिया, जिन्हें नशे के कुप्रभावों के बारे में पंपलेट के माध्यम से जानकारी दी गई।
न्यायालय परिसर में दिखा संकल्प का माहौल
पूरे दिन कहलगांव न्यायालय परिसर में नशा निषेध दिवस का प्रभाव दिखाई दिया। अधिवक्ताओं के बीच इस विषय पर चर्चा का दौर चलता रहा और उन्होंने तय किया कि वे अपने मुवक्किलों को भी इसके प्रति सचेत करेंगे। कार्यक्रम के अंत में एक लघु रैली भी निकाली गई, जिसमें लोगों ने नशे के खिलाफ नारे लगाए और समाज को जागरूक करने का आह्वान किया।
इस जागरूकता शिविर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि समाज के हर वर्ग के सहयोग से ही एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है। कहलगांव व्यवहार न्यायालय द्वारा उठाया गया यह कदम नशा मुक्त समाज के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।