भागलपुर-मुंगेर मरीन ड्राइव परियोजना को मिली नई रफ्तार, पर्यावरण मंजूरी के लिए बीएसआरडीसीएल ने शुरू की प्रक्रिया
भागलपुर। भागलपुर और मुंगेर के बीच प्रस्तावित गंगा पथ (मरीन ड्राइव) परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। परियोजना के निर्माण से पहले आवश्यक पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव संबंधी मंजूरियां प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए निगम ने राष्ट्रीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीईटी) से मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ एजेंसियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। चयनित एजेंसी परियोजना का विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन करेगी और विभिन्न केंद्रीय व राज्य स्तरीय विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कराने में तकनीकी सहयोग देगी।
बीएसआरडीसीएल की योजना मुंगेर के सफियाबाद से बरियारपुर, घोरघाट, सुल्तानगंज, भागलपुर होते हुए सबौर तक लगभग 82.80 किलोमीटर लंबा आधुनिक मरीन ड्राइव विकसित करने की है। यह सड़क गंगा नदी के समानांतर बनाई जाएगी, जिसमें जरूरत के अनुसार समतल सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर दोनों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद पूर्वी बिहार के दो प्रमुख शहरों भागलपुर और मुंगेर के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा।
पर्यावरणीय मंजूरी सबसे बड़ी चुनौती
परियोजना का बड़ा हिस्सा गंगा नदी के तटीय क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरण, वन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। विशेष रूप से मुंगेर (सफियाबाद) से सुल्तानगंज तक करीब 42 किलोमीटर लंबे हिस्से के लिए पर्यावरणीय स्वीकृतियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसी कारण बीएसआरडीसीएल ने एनएबीईटी से मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ एजेंसी की नियुक्ति का निर्णय लिया है।
चयनित एजेंसी परियोजना क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण करेगी। इसके तहत पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए), जैव विविधता का अध्ययन, वन भूमि की स्थिति, गंगा नदी के प्रवाह पर संभावित प्रभाव, जलजीवों और पक्षियों के संरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाएगी। एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल), पर्यावरण मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया पूरी होगी।
आधुनिक सड़क नेटवर्क से बदलेगी तस्वीर
मरीन ड्राइव के निर्माण का उद्देश्य केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि पूरे गंगा तटीय क्षेत्र के विकास को नई गति देना है। वर्तमान में भागलपुर और मुंगेर के बीच यात्रा के दौरान कई स्थानों पर सड़क संकरी होने और भारी वाहनों के दबाव के कारण लोगों को जाम और लंबी यात्रा का सामना करना पड़ता है। नई सड़क बनने से यात्रा का समय काफी कम होगा और यातायात अधिक सुगम हो जाएगा।
एलिवेटेड कॉरिडोर होने के कारण बाढ़ के समय भी सड़क पर आवागमन बाधित होने की संभावना कम रहेगी। साथ ही भारी वाहनों और स्थानीय यातायात को अलग-अलग दिशा में व्यवस्थित करने में भी सुविधा मिलेगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
व्यापार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि मरीन ड्राइव परियोजना पूर्वी बिहार के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भागलपुर का प्रसिद्ध रेशम उद्योग, मुंगेर के औद्योगिक क्षेत्र, सबौर कृषि विश्वविद्यालय और आसपास के कृषि क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा। किसानों के लिए कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा, जबकि व्यापारियों की परिवहन लागत में भी कमी आएगी।
बेहतर सड़क संपर्क से निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और नए उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। परिवहन तेज होने से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
गंगा तट के किनारे बनने वाली यह सड़क पर्यटन की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भागलपुर का विक्रमशिला विश्वविद्यालय, गंगा डॉल्फिन अभयारण्य, सुल्तानगंज का प्रसिद्ध अजगैवीनाथ धाम और मुंगेर का ऐतिहासिक किला जैसे पर्यटन स्थल बेहतर सड़क संपर्क से और अधिक आकर्षक बनेंगे।
श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भी इस सड़क का सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर यातायात व्यवस्था से श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगी। इसके अलावा गंगा किनारे विकसित होने वाला यह मार्ग भविष्य में पर्यटन के नए केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकता है।
विशेषज्ञ एजेंसी निभाएगी अहम भूमिका
बीएसआरडीसीएल द्वारा नियुक्त की जाने वाली विशेषज्ञ एजेंसी केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी। एजेंसी परियोजना से संबंधित सभी पर्यावरणीय दस्तावेज तैयार करेगी, संबंधित विभागों के समक्ष प्रस्तुतीकरण देगी और आवश्यक संशोधनों का सुझाव भी देगी। यदि किसी स्थान पर पर्यावरणीय जोखिम अधिक पाया जाता है तो उसके समाधान के लिए वैकल्पिक उपाय भी सुझाए जाएंगे।
एजेंसी यह भी सुनिश्चित करेगी कि परियोजना के दौरान गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह, तटीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। इसके अलावा वृक्षारोपण, मिट्टी संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण जैसी योजनाओं को भी परियोजना का हिस्सा बनाया जाएगा।
स्थानीय लोगों की बढ़ी उम्मीदें
मरीन ड्राइव परियोजना को लेकर भागलपुर, मुंगेर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से बेहतर सड़क संपर्क की मांग की जा रही थी। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है तो इससे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन सहित हर क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। उनका कहना है कि गंगा नदी देश की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है, इसलिए निर्माण कार्य पूरी सावधानी और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
जल्द शुरू हो सकता है अगला चरण
बीएसआरडीसीएल ने एजेंसी चयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। प्रस्तावों के मूल्यांकन के बाद योग्य एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके बाद पर्यावरणीय अध्ययन और आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सभी मंजूरियां समय पर मिलने की स्थिति में परियोजना के निर्माण कार्य का अगला चरण शुरू किया जा सकेगा।
राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से पूर्वी बिहार की आधारभूत संरचना को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। मरीन ड्राइव बनने के बाद न केवल भागलपुर और मुंगेर के बीच दूरी कम महसूस होगी, बल्कि यह मार्ग क्षेत्र के आर्थिक विकास, पर्यटन विस्तार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का भी आधार बनेगा। विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन के साथ यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में यह पूर्वी बिहार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल होगी।