दोनों हाथों के नस में ठोंकी सुई, हाथ फूलते ही दवा लाने के बहाने भागे 'यमराज' के कारिंदे!
बिहार के बेगूसराय जिले के बरौनी थाना क्षेत्र के पपरौर गांव से एक बेहद ही आक्रोशित करने वाली और स्वास्थ्य व्यवस्था की धज्जियां उड़ाती हुई खबर सामने आई है। यहां शुक्रवार को एक तथाकथित ग्रामीण चिकित्सक (Quack) और उसके नौसिखिए कंपाउंडर की घोर लापरवाही तथा गलत इलाज के कारण 60 वर्षीय बुजुर्ग सुन सुन पासवान की तड़प-तड़प कर दर्दनाक मौत हो गई।
इस घटना के बाद पूरे पपरौर गांव में कोहराम मच गया है। मौत की खबर सुनते ही गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने क्लीनिक को घेरकर जमकर हंगामा और बवाल काटा। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि जैसे ही बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टर और कंपाउंडर मरीज को तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही बरौनी थाने की पुलिस भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंची और उग्र लोगों को किसी तरह समझा-बुझाकर शांत कराया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी 'झोलाछाप' गैंग पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
खौफनाक वारदात: दोनों हाथों में लगा दी सुई, हाथ फूलते ही मची बेचैनी
स्थानीय सूत्रों और मृतक सुन सुन पासवान के बेटे से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को बुजुर्ग को हल्की अस्वस्थता या शारीरिक तकलीफ महसूस हो रही थी। पिता को राहत दिलाने के लिए उनका बेटा उन्हें गांव में ही स्थित एक निजी ग्रामीण चिकित्सक के क्लीनिक पर लेकर गया।
कंपाउंडर का 'खतरनाक' एक्सपेरिमेंट: क्लीनिक पर मुख्य डॉक्टर मौजूद नहीं था, या उसने अपने नौसिखिए कंपाउंडर को ही कमान सौंप रखी थी। कंपाउंडर ने बिना किसी सीनियर डॉक्टर की सलाह या मेडिकल डायग्नोसिस के, बुजुर्ग सुन सुन पासवान के दोनों हाथों की नसों (Veins) में एक-एक भारी इंजेक्शन (सुई) ठोंक दी।
हाथ फूलने लगा और भाग खड़े हुए आरोपी: इंजेक्शन लगते ही बुजुर्ग के शरीर में रिएक्शन शुरू हो गया। देखते ही देखते उनका एक हाथ तेजी से सूजने (फूलने) लगा और उन्हें सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी। जब बेटे ने घबराकर इस बारे में पूछा, तो शातिर कंपाउंडर ने बड़ी चालाकी से कहा, "घबराओ मत, मैं बस 10 मिनट में एक और जरूरी दवा लेकर आ रहा हूँ।" इसके तुरंत बाद क्लीनिक का मुख्य चिकित्सक भी '10 मिनट' का बहाना बनाकर वहां से रफूचक्कर हो गया।
तड़पते रहे बुजुर्ग, बंद हो गईं सांसें: 2 घंटे बाद लौटा डॉक्टर
क्लीनिक में अब केवल बेबस बेटा और मौत से जंग लड़ रहे बुजुर्ग सुन सुन पासवान अकेले रह गए थे।
भीषण तड़प का वो मंजर: दवा लाने के बहाने भागे डॉक्टर और कंपाउंडर वापस नहीं लौटे। इधर बुजुर्ग की बेचैनी और छाती का दर्द आसमान छूने लगा। वे बेड पर ही तड़पने लगे। बेटे ने चीख-पुकार मचाई, आस-पास के लोग दौड़े, लेकिन जब तक कोई दूसरा डॉक्टर या एम्बुलेंस बुलाई जाती, तब तक सुन सुन पासवान के शरीर की हलचल हमेशा के लिए थम चुकी थी।
परिजनों का महा-हंगामा: पिता की मौत की पुष्टि होते ही बेटे का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव के सैकड़ों लोग क्लीनिक पर इकट्ठा हो गए और तोड़फोड़ तथा नारेबाजी शुरू कर दी। घटना के करीब 2 घंटे बाद जब आरोपी चिकित्सक वापस क्लीनिक के पास मंडराते हुए पकड़ा गया, तो लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
एक नज़र में: बरौनी पपरौर मेडिकल लापरवाही केस
| मुख्य बिंदु और तथ्य | ग्राउंड जीरो की विस्तृत रिपोर्ट |
|---|---|
| घटनास्थल | पपरौर गांव, बरौनी थाना क्षेत्र (बेगूसराय) |
| मृतक बुजुर्ग | सुन सुन पासवान (उम्र 60 वर्ष) |
| लापरवाही का कारण | कंपाउंडर द्वारा दोनों हाथों की नस में गलत इंजेक्शन लगाना |
| आरोपियों का कृत्य | मरीज की हालत बिगड़ने पर क्लीनिक छोड़कर फरार होना |
| प्रशासनिक एक्शन | बरौनी पुलिस ने शव को कब्जे में लिया, पोस्टमार्टम के लिए भेजा |
| जांच का विषय | अवैध क्लीनिक का संचालन और गैर-कानूनी मेडिकल प्रैक्टिस |
पुलिस की एंट्री: शव को कब्जे में लेकर भेजा पोस्टमार्टम हाउस
क्लीनिक पर हो रहे भारी बवाल और तनाव की सूचना जैसे ही बरौनी थाना अध्यक्ष को मिली, उन्होंने बिना वक्त गंवाए पुलिस की एक त्वरित कार्यबल टीम को पपरौर गांव के लिए रवाना किया।
गुस्साए लोगों को शांत कराया: पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले आक्रोशित भीड़ के चंगुल से क्लीनिक परिसर को सुरक्षित किया और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। पुलिस ने आश्वासन दिया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव: पुलिस ने कागजी प्रक्रिया (Inquest Report) पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही यह आधिकारिक तौर पर साफ हो पाएगा कि इंजेक्शन में कौन सा खतरनाक साल्ट था जिसके कारण बुजुर्ग की तत्काल मौत हो गई।
अवैध क्लीनिकों पर जांच की तलवार: पुलिस ने इस अवैध क्लीनिक से कुछ दवाइयां, सिरिंज और दस्तावेज भी जब्त किए हैं। पुलिस मुख्य आरोपी डॉक्टर और फरार कंपाउंडर के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) और बिना डिग्री के डॉक्टरी करने के तहत मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
'झोलाछाप' डॉक्टरों का आतंक: कब जागेगा स्वास्थ्य महकमा?
बरौनी के पपरौर गांव की यह घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह खुले 'अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप डॉक्टरों' के खौफनाक नेटवर्क को उजागर करती है।
ग्रामीणों के तीखे सवाल: स्थानीय लोगों का आरोप है कि बेगूसराय के ग्रामीण इलाकों में बिना किसी वैध एमबीबीएस (MBBS) डिग्री के, केवल कम्पाउंडरी सीखकर सैकड़ों लोग अपनी दुकानें खोलकर बैठे हैं। ये लोग भोले-भाले ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ करते हैं और जब भी कोई केस बिगड़ता है, तो मरीज को मरने के लिए छोड़कर भाग जाते हैं। जिला सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती के कारण इन 'मौत के सौदागरों' के हौसले बुलंद हैं।
60 वर्षीय सुन सुन पासवान की मौत कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक मेडिकल मर्डर है। एक नौसिखिए कंपाउंडर द्वारा नस में दो-दो सुइयां ठोंक देना और फिर डॉक्टर का भाग जाना उनकी आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है। बरौनी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर स्थिति को तो संभाल लिया है, लेकिन अब समय आ गया है कि प्रशासन बेगूसराय के ऐसे तमाम अवैध क्लीनिकों पर बुलडोजर चलाए और उन्हें सील करे, ताकि भविष्य में किसी और बेटे के सिर से उसके पिता का साया इस तरह की घोर लापरवाही के कारण न उठे!