भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल, परिवार ने एसपी पर लगाए गंभीर आरोप, आज बिलौटी पहुंचेंगे कई नेता
डिजिटल डेस्क, आरा। भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवाल अब धीरे-धीरे राजनीतिक रंग लेते दिखाई दे रहे हैं। एक ओर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जातीय संगठनों के प्रतिनिधि लगातार मृतक के पैतृक गांव बिलौटी पहुंचकर परिजनों से मुलाकात कर रहे हैं। इस बीच भरत तिवारी के परिवार ने भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले को नया मोड़ दे दिया है।
शनिवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बिलौटी गांव पहुंचने का कार्यक्रम है। इन नेताओं के आगमन को देखते हुए गांव में हलचल तेज हो गई है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
परिवार ने निष्पक्ष जांच पर जताया अविश्वास
भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि परिवार को वर्तमान जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है। उनका आरोप है कि जब जिले के पुलिस अधीक्षक स्वयं परिवार को कथित रूप से धमकी दे रहे हैं, तब निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि परिवार चाहता है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय जांच दल से कराई जाए, ताकि घटना की वास्तविक सच्चाई सामने आ सके।
परिवार का कहना है कि एनकाउंटर को लेकर कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अभी तक नहीं मिले हैं। उनका आरोप है कि पुलिस की ओर से घटना के संबंध में जो जानकारी दी गई है, उसमें कई बिंदुओं पर स्पष्टता का अभाव है। इसी कारण परिवार लगातार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
गांव में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
भरत तिवारी की मौत के बाद से बिलौटी गांव लगातार राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि गांव पहुंचकर परिजनों से मुलाकात कर रहे हैं और उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दे रहे हैं। शनिवार को कई बड़े नेताओं के गांव पहुंचने की सूचना के बाद स्थानीय लोगों की भीड़ बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति में भी प्रमुख मुद्दा बन सकता है। विपक्षी दल पहले ही घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठा चुके हैं, जबकि सामाजिक संगठन भी प्रशासन से पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
लगातार उठ रहे सवालों और बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच जिला प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की चुनौती है। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पूरे घटनाक्रम की निगरानी किए जाने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि मामले की सच्चाई सामने आने तक विवाद थमने वाला नहीं है। कई लोगों का मानना है कि पारदर्शी जांच ही सभी पक्षों के बीच विश्वास कायम कर सकती है।
पुलिस का पक्ष भी महत्वपूर्ण
हालांकि परिवार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों पर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच नियमानुसार की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। यदि परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई शिकायत या साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं, तो जांच एजेंसियां उनका परीक्षण कर सकती हैं।
गांव में सुरक्षा के विशेष इंतजाम
शनिवार को कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के आगमन को देखते हुए बिलौटी गांव और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रशासन का कहना है कि सभी कार्यक्रमों पर नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
न्याय की मांग पर अड़ा परिवार
भरत तिवारी के परिजनों का कहना है कि वे न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। परिवार का दावा है कि उन्हें निष्पक्ष जांच और पूरी पारदर्शिता चाहिए। परिजनों ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे उच्च न्यायालय और अन्य संवैधानिक संस्थाओं का भी दरवाजा खटखटाएंगे।
इस बीच गांव में आने वाले नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी परिवार को समर्थन मिलने की उम्मीद है। इससे मामले को और अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक महत्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।
आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर है। यदि मामले की जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल सकती है। वहीं राजनीतिक दलों की सक्रियता और परिवार के लगातार उठ रहे सवालों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा का विषय बना रह सकता है।
फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद थमता नहीं दिख रहा है। एक ओर परिवार निष्पक्ष जांच की मांग पर अडिग है, तो दूसरी ओर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की बढ़ती भागीदारी ने मामले को नया आयाम दे दिया है। ऐसे में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही इस पूरे प्रकरण पर उठ रहे सवालों का जवाब देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।