भाजपा जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों पर हुई चर्चा, 'राष्ट्र सर्वोपरि' का लिया संकल्प
भागलपुर: भारतीय जनता पार्टी की ओर से रविवार को जवारीपुर में एक भव्य जिला कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 'स्मरण पखवाड़े' के तहत संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले भर से आए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ भाग लिया और संगठन की मजबूती के लिए नई रणनीति पर चर्चा की।
विचार आधारित पार्टी की पहचान
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलित करके की गई। सम्मेलन की अध्यक्षता भाजपा जिला अध्यक्ष संतोष कुमार ने की।
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल विधान परिषद सदस्य (MLC) और प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा अन्य दलों से अलग है, क्योंकि यह 'विचार आधारित' पार्टी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पार्टी ने अपने सिद्धांतों और संस्कारों से कभी समझौता नहीं किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे डॉ. मुखर्जी के 'राष्ट्र सर्वोपरि' के मंत्र को आत्मसात करें और इसे जन-जन तक पहुँचाएं।
'राष्ट्र सर्वोपरि' का संदेश
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधान परिषद सदस्य डॉ. एन.के. यादव और जिला प्रभारी राजेश जैन ने डॉ. मुखर्जी के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन केवल एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की एक जीती-जागती मिसाल है। उनके विचार आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब थे। वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे देश की एकता और अखंडता के लिए समर्पित भाव से कार्य करें।
कार्यकर्ताओं का उत्साह
इस जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में अनुशासन और सेवाभाव की झलक देखने को मिली। जवारीपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में पवन मिश्रा, राजकुमार सिंह, बंटी यादव, निरंजन साह, श्वेता सिंह, आशीष पांडे और मनीष दास सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सम्मेलन के दौरान बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संगठन के विस्तार के लिए मेहनत करने की शपथ ली।
यह सम्मेलन न केवल डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि देने का एक माध्यम बना, बल्कि कार्यकर्ताओं के भीतर नई ऊर्जा का संचार करते हुए आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार कर गया।