प्रखंड संसाधन केंद्र में 'विज्ञान एवं गणित' कार्यशाला का आयोजन; शिक्षण में नवाचार को लेकर शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण

नारायणपुर (भागलपुर): शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सुधार और छात्रों की तार्किक क्षमता को विकसित करने के उद्देश्य से नारायणपुर स्थित प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC) में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य विषय 'विज्ञान एवं गणित विषयों में छात्रों के अधिगम स्तर (Learning Level) में सुधार' था। कार्यक्रम में प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सभी मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और विज्ञान व गणित के नामित शिक्षक शामिल हुए।

गतिविधि आधारित शिक्षण (Activity-Based Learning) पर जोर

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को उन आधुनिक शिक्षण विधियों से परिचित कराना था, जिनसे रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर बच्चों में विषय की समझ पैदा की जा सके। रिसोर्स पर्सन (विशेषज्ञों) ने बताया कि विज्ञान और गणित जैसे जटिल विषयों को 'गतिविधि आधारित शिक्षण' के माध्यम से कैसे रोचक बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों को डेमो देकर दिखाया कि कैसे घर में उपलब्ध सामान्य चीजों का उपयोग करके गणित के सूत्रों को हल किया जा सकता है और विज्ञान के सिद्धांतों को प्रयोग के माध्यम से समझाकर छात्रों के मन में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा जगाई जा सकती है।

क्या बोले शिक्षा विभाग के अधिकारी?

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा, "छात्रों के अधिगम स्तर में सुधार के लिए सबसे पहले शिक्षकों को नवाचारी बनना होगा। यदि हम कक्षा में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक उदाहरणों का उपयोग करेंगे, तो निश्चित रूप से परिणाम बेहतर होंगे।" उन्होंने सभी शिक्षकों को निर्देश दिया कि कार्यशाला में सीखी गई बारीकियों को वे अपने-अपने विद्यालयों में जाकर छात्रों पर लागू करें।

शिक्षकों के बीच मंथन

कार्यशाला के दौरान एक सत्र शिक्षकों के बीच मंथन का भी रहा। कई शिक्षकों ने साझा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में गणित का डर (Maths Phobia) बड़ा कारण है, जिसके कारण वे विज्ञान की ओर रुख करने से कतराते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षकों को सुझाव दिया गया कि वे बच्चों के साथ 'पीयर लर्निंग' (Peer Learning) यानी सहपाठी शिक्षण पर जोर दें, जहाँ बच्चे एक-दूसरे की मदद से कठिन सवालों को हल करना सीखें।

कार्यशाला की मुख्य विशेषताएं:

टीएलएम (TLM) का प्रदर्शन: शिक्षकों को कम लागत और शून्य निवेश वाले 'टीचिंग लर्निंग मटेरियल' बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।

सरल तकनीक: गणित के जटिल समीकरणों को खेल-खेल में सिखाने की तकनीक पर विशेष चर्चा हुई।

प्रभावी कक्षा प्रबंधन: शिक्षण के दौरान छात्रों को कैसे सक्रिय रखा जाए, इस पर शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए।

आगे की राह

कार्यशाला के समापन पर प्रखंड संसाधन केंद्र के समन्वयक ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि कार्यशाला में सिखाए गए तरीकों का प्रभाव कक्षा तक कितना पहुंच रहा है।

इस पहल से नारायणपुर प्रखंड के मध्य विद्यालयों में शैक्षिक माहौल में एक नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। शिक्षकों ने भी संकल्प लिया कि वे छात्रों के भविष्य को संवारने के लिए इन नई तकनीकों का उपयोग पूरी ईमानदारी से करेंगे। उम्मीद है कि 'मिशन दक्ष' और अन्य शैक्षणिक सुधार योजनाओं के साथ मिलकर यह कार्यशाला छात्रों के शैक्षिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।