भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर सम्राट चौधरी का बड़ा प्रहार, बोले- 30 दिन में काम नहीं हुआ तो 31वें दिन होगा निलंबन
जागरण संवाददाता, पटना। बिहार सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता के कार्यों में अनावश्यक देरी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक का वैध कार्य 30 दिनों के भीतर पूरा नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ 31वें दिन से ही कठोर विभागीय कार्रवाई शुरू होगी और आवश्यकता पड़ने पर निलंबन भी किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राज्य सरकार सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति में सुधार, भ्रष्टाचार पर अंकुश और समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराने को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है। सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम लोगों को बिना किसी परेशानी के सरकारी सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा रही है।
जनता का काम समय पर करना अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी
सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जनता सरकार पर भरोसा करके अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों में आती है। ऐसे में किसी भी नागरिक को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना या फाइलों को जानबूझकर लंबित रखना स्वीकार्य नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का पहला दायित्व जनता के कार्यों का समय पर निष्पादन करना है। यदि किसी मामले में तकनीकी या कानूनी अड़चन है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी आवेदक को दी जानी चाहिए। लेकिन बिना किसी उचित कारण के फाइलों को रोकना या अनावश्यक देरी करना गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि बिहार सरकार भ्रष्टाचार के प्रति "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत लेने, जानबूझकर कार्य में देरी करने या आम लोगों का उत्पीड़न करने की शिकायत सही पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, ताकि आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सके और अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो।
30 दिनों की समयसीमा पर विशेष जोर
सम्राट चौधरी ने कहा कि अधिकांश सरकारी सेवाओं के लिए समयसीमा पहले से निर्धारित है। इसके बावजूद यदि अधिकारी निर्धारित अवधि के भीतर काम पूरा नहीं करते हैं, तो यह आम लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर जनता के काम को 30 दिनों के भीतर निष्पादित नहीं किया गया, तो दोषी पदाधिकारी को 31वें दिन सस्पेंड होने से कोई नहीं बचा सकता।"
उन्होंने कहा कि यह केवल चेतावनी नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट नीति है। विभागों को निर्देश दिया गया है कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और अनावश्यक विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई करें।
लालफीताशाही खत्म करने पर सरकार का फोकस
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए महीनों तक इंतजार न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक घुमाने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त करना होगा।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग को कार्यप्रणाली में सुधार लाकर प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए। इससे न केवल लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।
अधिकारियों को दिए कई निर्देश
बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करें। साथ ही प्रत्येक कार्यालय में लंबित फाइलों की सूची तैयार कर नियमित समीक्षा की जाए।
उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा। जिन कार्यालयों में लगातार शिकायतें मिलेंगी, वहां विशेष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल मॉनिटरिंग पर रहेगा जोर
सरकार अब विभिन्न विभागों के कार्यों की ऑनलाइन निगरानी भी बढ़ाने की तैयारी में है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी आवेदनों और उनकी प्रगति को डिजिटल पोर्टल पर अपडेट किया जाए, ताकि आवेदक स्वयं अपने आवेदन की स्थिति देख सकें।
सम्राट चौधरी ने कहा कि तकनीक के बेहतर उपयोग से भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी और जवाबदेही बढ़ेगी।
जनता को मिलेगी राहत
सरकार के इस सख्त रुख से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से लोग सरकारी कार्यालयों में कार्यों में देरी, अनावश्यक दस्तावेजों की मांग और बार-बार चक्कर लगाने जैसी समस्याओं का सामना करते रहे हैं। यदि समयसीमा का सख्ती से पालन होता है, तो लोगों को सरकारी सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध सेवा वितरण और जवाबदेही तय होने से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आएगा तथा जनता और सरकार के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
सरकार का स्पष्ट संदेश
उपमुख्यमंत्री के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि बिहार सरकार प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में अब पहले से अधिक सख्ती बरतने के पक्ष में है। सरकार चाहती है कि प्रत्येक अधिकारी जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए और निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी वैध कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित करे।
सरकार का मानना है कि पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध प्रशासन ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार और लालफीताशाही के खिलाफ लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि आम नागरिकों को बेहतर प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।