नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने वाले प्रेमी को पुलिस ने किया गिरफ्तार, युवती को ठाकुरबाड़ी चौक से किया बरामद
कहलगांव/भागलपुर: कहलगांव में पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई का एक और उदाहरण सामने आया है। स्थानीय थाना क्षेत्र से एक दिन पूर्व अपने प्रेमी के साथ फरार हुई नाबालिग लड़की को पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर ठाकुरबाड़ी चौक के समीप से सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। लड़की की बरामदगी के साथ ही पुलिस ने उसे बहला-फुसलाकर भगाने के आरोपी प्रेमी को भी हिरासत में ले लिया है। इस घटना ने क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित नाबालिग लड़की के परिजनों ने बुधवार को कहलगांव थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी को गांव के ही एक युवक ने प्रेमजाल में फंसाकर घर से भगा ले गया है। परिजनों का आरोप था कि युवक ने नाबालिग को शादी का झांसा दिया था। शिकायत मिलते ही कहलगांव पुलिस ने इसे संज्ञान में लिया और मामले को गंभीरता से देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया।
पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान और मोबाइल लोकेशन की मदद लेनी शुरू की। पुलिस की इस टीम ने शहर के विभिन्न संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। इसी क्रम में, गुरुवार की सुबह ठाकुरबाड़ी चौक के पास पुलिस को सूचना मिली कि उक्त युवक युवती के साथ मौजूद है। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की और प्रेमी युगल को अपनी हिरासत में ले लिया।
न्यायिक प्रक्रिया और मेडिकल परीक्षण
बरामदगी के बाद पुलिस की पहली प्राथमिकता नाबालिग की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को पूरा करना था। पुलिस नाबालिग को कड़ी सुरक्षा के बीच अनुमंडल अस्पताल ले गई, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण (Medical Examination) कराया गया। मेडिकल जांच के बाद, कानून के अनुसार नाबालिग का बयान दर्ज कराने के लिए उसे कहलगांव अनुमंडल न्यायालय (SDO Court) में पेश किया गया।
न्यायाधीश के समक्ष नाबालिग ने अपने बयान दर्ज कराए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, नाबालिग ने पूछताछ के दौरान घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बताया है। अब न्यायालय के निर्देशानुसार ही उसे उसके परिजनों को सौंपने या सुधार गृह भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रेमी पर कानूनी शिकंजा
नाबालिग को भगाने के आरोपी युवक को पुलिस ने नामजद किया है। उस पर अपहरण और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चूंकि लड़की नाबालिग है, इसलिए उसकी सहमति का कानून की दृष्टि में कोई महत्व नहीं है। ऐसे में आरोपी को कठोर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
थानाध्यक्ष ने मीडिया को बताया कि, "सूचना मिलते ही हमारी टीम ने लगातार प्रयास किए। नाबालिग की बरामदगी ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। आरोपी से पूछताछ की जा रही है कि वह उसे कहां-कहां ले गया था और क्या इस साजिश में किसी अन्य व्यक्ति का हाथ है।"
क्षेत्र में अभिभावकों के बीच चिंता
कहलगांव के शहरी और ग्रामीण इलाकों में नाबालिगों के घर से भागने की बढ़ती घटनाओं ने स्थानीय अभिभावकों की नींद उड़ा दी है। इस घटना के बाद से समाज के प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के कारण किशोर-किशोरियां जल्दी ही गलत रास्तों पर भटक जाते हैं। उन्होंने पुलिस से आग्रह किया है कि ऐसे गिरोहों पर भी नजर रखी जाए जो नाबालिगों को बहलाने में मदद करते हैं।
पुलिस ने भी अभिभावकों को सलाह दी है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उनके मोबाइल उपयोग को लेकर सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि समय रहते अगर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी होती, तो हो सकता है कि यह मामला और भी जल्दी सुलझ जाता।
पुलिस की सक्रियता की सराहना
पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। जिस तरह से पुलिस ने एक दिन के भीतर न केवल नाबालिग को बरामद किया, बल्कि आरोपी को भी गिरफ्त में लिया, उससे कानून-व्यवस्था के प्रति आम जनता का भरोसा बढ़ा है।
अब पुलिस इस मामले की अंतिम चार्जशीट तैयार करने की प्रक्रिया में जुट गई है, ताकि आरोपी को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख पर न्यायालय अपना अंतिम निर्णय सुनाएगा। फिलहाल, नाबालिग को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द करने के लिए कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
यह मामला उन सभी युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो कानून की गंभीरता को नहीं समझते। नाबालिग को भगाना एक गंभीर अपराध है, जिसमें लंबी जेल की सजा हो सकती है। पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि वे कहलगांव में किसी भी तरह के अपराध को पनपने नहीं देंगे और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।