मारपीट से आहत किशोर ने खाया जहरीला पदार्थ; हालत नाजुक, मायागंज रेफर

सुल्तानगंज/भागलपुर: सुल्तानगंज थाना क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां आपसी मारपीट और प्रताड़ना से तंग आकर एक किशोर ने जानलेवा कदम उठा लिया। गुस्से और हताशा में आकर उसने कथित रूप से जहरीली दवा (कीटनाशक) का सेवन कर लिया, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। आनन-फानन में परिजनों ने उसे सुल्तानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) रेफर कर दिया है।

घटना का घटनाक्रम: एक विवाद जो जानलेवा बन गया

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित किशोर स्थानीय निवासी है। बताया जा रहा है कि बुधवार की दोपहर किसी बात को लेकर मोहल्ले के ही कुछ लोगों के साथ उसका विवाद हो गया था। यह विवाद देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गया। आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने किशोर के साथ न केवल धक्का-मुक्की की, बल्कि उसे बुरी तरह प्रताड़ित भी किया।

इस घटना के बाद सदमे और अपमान से भरा किशोर घर लौटा। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, वह काफी गुस्से और तनाव में था। उसने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और घर में मौजूद कीटनाशक दवा का सेवन कर लिया। कुछ देर बाद जब वह बेहोश होने लगा, तो घर के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी हुई। कमरे का दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला गया, तो वह अचेत अवस्था में था।

CHC में हुआ हंगामा और इलाज की जद्दोजहद

जैसे ही परिजन उसे लेकर सुल्तानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, वहां अफरा-तफरी मच गई। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने तत्काल प्रभाव से किशोर का 'स्टमक वॉश' (पेट की सफाई) शुरू किया। अस्पताल में इलाज के दौरान किशोर के परिजन और आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में जमा हो गए।

प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने पाया कि जहर का असर उसके शरीर में तेजी से फैल रहा था और उसे वेंटिलेटर या आईसीयू की सुविधा की आवश्यकता थी। सुल्तानगंज CHC में ऐसी उन्नत सुविधाओं का अभाव होने के कारण, चिकित्सकों ने उसे तत्काल मायागंज अस्पताल रेफर करने का निर्णय लिया। अस्पताल में इस घटना को लेकर तनाव का माहौल बना रहा।

पुलिस पहुंची जांच के लिए

घटना की सूचना मिलते ही सुल्तानगंज पुलिस मौके पर पहुंची। नगर थानाध्यक्ष ने बताया कि मामले की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने पीड़ित के परिजनों के बयान दर्ज करने की कोशिश की है। पुलिस ने कहा कि अभी प्राथमिकता किशोर की जान बचाना है, उसके बाद आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों ने मारपीट करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना के कारणों का सही पता चल सके। क्या यह मामला केवल मामूली कहासुनी का था या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश थी, इसकी जांच की जा रही है।

समाज के लिए एक सबक: मानसिक स्वास्थ्य और संवाद

यह घटना किशोरों के बीच बढ़ते तनाव और धैर्य की कमी पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। एक तरफ जहां मारपीट जैसी घटनाएं कानून-व्यवस्था को चुनौती देती हैं, वहीं दूसरी तरफ युवा पीढ़ी का इस तरह के आत्मघाती कदम उठाना समाज के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोर अवस्था (Adolescence) में भावनात्मक उतार-चढ़ाव बहुत अधिक होते हैं। ऐसे में यदि कोई बच्चा किसी विवाद या प्रताड़ना का शिकार होता है, तो परिवार का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी विवाद को खुद से सुलझाने के बजाय अपने बड़ों या पुलिस की मदद लें।

मायागंज अस्पताल में स्थिति

मायागंज अस्पताल (JLNMCH) के सूत्रों के मुताबिक, किशोर को आपातकालीन वार्ड (Emergency Ward) में भर्ती किया गया है। चिकित्सकों की एक विशेष टीम उसकी निगरानी कर रही है। अगले 24 से 48 घंटे उसके स्वास्थ्य के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। पुलिस ने अस्पताल में भी सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने।

यह घटना न केवल सुल्तानगंज बल्कि पूरे जिले के लिए एक चेतावनी है। कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन किसी भी विवाद को इतना बड़ा बना देना कि कोई अपनी जान देने पर आमादा हो जाए, यह संवेदनशीलता के अभाव को दर्शाता है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई करती है।