श्रावणी मेले की आहट से गूंजी कांवरियों की जयघोष, देवघर के लिए रवाना हुआ 70 किलो का कांवर लेकर जत्था
सुल्तानगंज/भागलपुर: पवित्र श्रावणी मेला के आगाज में अब मात्र 21 दिन शेष हैं, लेकिन सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा तट पर अभी से ही केसरिया रंग में रंगे कांवरियों का रेला उमड़ने लगा है। बाबा अजगैवीनाथ की नगरी हर-हर महादेव और बोल-बम के नारों से गूंज रही है। इसी क्रम में, बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से आए कांवरियों के एक 26 सदस्यीय दल ने गंगा में डुबकी लगाकर अपनी यात्रा का संकल्प लिया और अटूट श्रद्धा के साथ देवघर के लिए प्रस्थान किया।
70 किलो का कांवर: भक्ति और संकल्प का अद्भुत संगम
मुर्शिदाबाद से आए इस 26 सदस्यीय जत्थे में शामिल कांवरियों की श्रद्धा देख हर कोई नतमस्तक हो गया। इस दल ने न केवल गंगा जल भरा, बल्कि 70 किलोग्राम वजनी एक विशाल और भव्य कांवर भी साथ लिया। इस भारी-भरकम कांवर को लेकर इन श्रद्धालुओं ने बाबा अजगैवीनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की।
कांवरिया दल के सदस्यों ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से श्रावणी मेले से पूर्व ही बाबा नगरी की यात्रा करते हैं। उनका यह 70 किलो का कांवर केवल वजन नहीं, बल्कि उनकी अटूट आस्था और मन्नत का प्रतीक है। हर कदम पर 'बोल-बम' का घोष करते हुए, यह दल भारी कांवर के साथ कठिन रास्तों को तय करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
श्रद्धा का सैलाब और सुल्तानगंज की तैयारी
सुल्तानगंज प्रशासन और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने बताया कि मेले में अभी भले ही तीन सप्ताह का समय है, लेकिन कांवरियों का आगमन शुरू हो गया है। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। घाटों की सफाई, प्रकाश की व्यवस्था और कांवरिया पथ पर पेयजल के इंतजामों को दुरुस्त किया जा रहा है।
बाबा अजगैवीनाथ धाम के मुख्य पुजारी ने बताया, "मुर्शिदाबाद से आए इन कांवरियों की टोली ने यह साबित कर दिया है कि बाबा के प्रति आस्था के आगे न तो दूरी कोई बाधा है और न ही शारीरिक कष्ट। इनका यह जत्था पूरे रास्ते अन्य कांवरियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।"
यात्रा का मार्ग और चुनौतियां
यह 26 सदस्यीय दल सुल्तानगंज से जल भरने के बाद सुप्रसिद्ध 'कांवरिया पथ' से होते हुए देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर की ओर बढ़ेगा। लगभग 105 किलोमीटर की यह पदयात्रा घने जंगलों, पहाड़ों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरती है। 70 किलो के कांवर के साथ इस यात्रा को पूरा करना निश्चित रूप से एक कठिन परीक्षा है, लेकिन कांवरियों के चेहरे पर थकान के स्थान पर बाबा के दर्शन की ललक साफ देखी जा सकती है।
रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न शिविरों और सेवा केंद्रों में इस दल का स्वागत करने के लिए स्थानीय लोग तत्पर रहते हैं। कांवरिया पथ पर सेवा करने वाले स्वयंसेवकों का कहना है कि ऐसे दल जो भारी कांवर लेकर चलते हैं, उनके लिए विशेष स्वास्थ्य शिविरों और मालिश केंद्रों में अधिक सुविधा दी जाती है।
स्थानीय प्रशासन की सतर्कता
श्रावणी मेले के दौरान लाखों की संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए जिलाधिकारी ने भी सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। कांवरिया पथ में मेडिकल कैंप, टेंट सिटी और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुल्तानगंज से देवघर तक जाने वाले कांवरिया मार्ग पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस की तैनाती भी सुनिश्चित की जा रही है।
मेला शुरू होने से पहले ही गंगा घाटों पर बैरिकेडिंग और गोताखोरों की व्यवस्था की गई है ताकि स्नान के दौरान कोई अनहोनी न हो। कांवरिया दल के स्वागत के लिए भी प्रशासन ने स्थानीय सामुदायिक केंद्रों को तैयार रखा है।
एक आध्यात्मिक संदेश
मुर्शिदाबाद के इन श्रद्धालुओं की पदयात्रा इस बात का प्रमाण है कि श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह देश भर के भक्तों को जोड़ने वाला एक बड़ा सांस्कृतिक सेतु है। पश्चिम बंगाल से आने वाले ये भक्त न केवल अपनी संस्कृति को बाबा के दरबार तक ले जा रहे हैं, बल्कि वे भाईचारे और आस्था का भी संदेश फैला रहे हैं।
जैसे-जैसे 21 दिनों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, सुल्तानगंज में तैयारियों का शोर बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह नगरी करोड़ों कांवरियों के स्वागत के लिए खुद को सजा रही है। इस 26 सदस्यीय जत्थे की यात्रा एक शुभ संकेत है कि आगामी श्रावणी मेला ऐतिहासिक होने वाला है।