रेडीमेड कपड़ों की धूम, भागलपुर बना हब
भागलपुर: श्रावणी मेला की आहट के साथ ही भागलपुर के थोक कपड़ा बाजार में रौनक बढ़ गई है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान का समय नहीं है, बल्कि कोसी, सीमांचल, अंग प्रदेश और झारखंड के एक बड़े हिस्से के लिए यह आर्थिक सुदृढ़ता का एक बड़ा जरिया भी है। इस बार बाजार की तस्वीर बदली हुई है। कांवरियों की पसंद में बड़ा बदलाव आया है और अब अधिकांश श्रद्धालु कपड़ा खरीदकर सिलवाने के बजाय 'रेडीमेड' परिधानों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बाजार में 'रेडीमेड' का बोलबाला
कभी सावन के महीने में लोग कपड़े के थान खरीदते थे और फिर दर्जियों के पास सिलवाते थे, लेकिन बदलते वक्त के साथ भागलपुर के बाजारों में अब रेडीमेड भगवा कपड़ों की भरमार है। व्यापारियों का कहना है कि अब कांवरियों के पास समय की कमी होती है, इसलिए वे तैयार (रेडीमेड) ड्रेस खरीदना अधिक आसान समझते हैं।
बाजार में किन चीजों की मांग सबसे अधिक है?
भगवा टी-शर्ट और कुर्ता: युवाओं और वयस्कों की पहली पसंद बने हुए हैं।
लोअर और हाफ पैंट: लंबी पैदल यात्रा (कांवरिया पथ) के दौरान सुविधा को देखते हुए इनकी भारी मांग है।
गमछा और विशेष बोलबम ड्रेस: बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार 'बोलबम ड्रेस' इस बार बाजार का मुख्य आकर्षण हैं।
भागलपुर: कोसी-सीमांचल और झारखंड का बड़ा बाजार
भागलपुर का थोक बाजार केवल स्थानीय शहर तक सीमित नहीं है। यहाँ से कोसी, पूर्णिया, कटिहार (सीमांचल) और झारखंड के देवघर, दुमका व अन्य जिलों के खुदरा दुकानदार थोक में बोलबम परिधान खरीदकर ले जा रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार, श्रावणी मेला के दौरान भागलपुर के कपड़ा कारोबार में करोड़ों का लेनदेन होता है। सुलतानगंज से लेकर देवघर तक फैला 105 किलोमीटर लंबा कांवरिया पथ इस दौरान एक 'जीवंत बाजार' बन जाता है, जहां 20,000 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें सजती हैं।
आर्थिक गतिविधियों का केंद्र
श्रावणी मेला का महत्व केवल धर्म तक सीमित नहीं है, यह एक 'इकोनॉमिक कैटलिस्ट' (आर्थिक उत्प्रेरक) की तरह है।
महंगाई का असर: व्यापारियों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में कपड़ों की थोक कीमतों में बहुत बदलाव नहीं आया है, लेकिन खुदरा बाजार में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा रही है।
जीवन यापन का आधार: कई परिवारों के लिए सावन के महीने की एक महीने की कमाई ही पूरे साल का गुजारा करती है। बंजर पड़ी भूमि पर तंबू लगाकर दुकान चलाने वाले गरीब से लेकर बड़े थोक विक्रेताओं तक, सबकी नजरें इसी मेले पर टिकी रहती हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और भव्य आयोजन
इस वर्ष श्रावणी मेला 2026 को लेकर सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भागलपुर में मेले की तैयारियों और विकास योजनाओं की समीक्षा की है। लाखों की संख्या में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क सुधार, सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट पर जोर दिया जा रहा है ताकि सुल्तानगंज से जल लेकर देवघर जाने वाले कांवरियों को कोई असुविधा न हो।
श्रावणी मेला में रेडीमेड कपड़ों का बढ़ता चलन यह दर्शाता है कि भक्त अब भक्ति के साथ-साथ सुविधा (Convenience) को भी महत्व दे रहे हैं। भागलपुर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण इस पूरे 'बोलबम बाजार' का केंद्र बना हुआ है, जहां आस्था की रूनझुन के साथ-साथ करोड़ों के कारोबार की धमक भी सुनाई दे रही है। आने वाले एक माह तक बाजार का यह गुलजार रहना तय है, जो न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, बल्कि हजारों छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए उन्नति का सुनहरा अवसर भी है।