नारायणपुर: प्रशासनिक फेरबदल, एडीएम संचालन व डीसीएलआर को बनाया गया उपस्थापन पदाधिकारी
नारायणपुर: वर्ष 2023 के दौरान नारायणपुर प्रखंड से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के तहत विभागीय कार्यवाही और कानूनी मामलों के निष्पादन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिकाओं में बड़ा बदलाव किया गया था। प्रशासनिक पारदर्शिता और विभागीय कार्यों में गति लाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा जारी एक निर्देश के अनुसार, अपर जिला दंडाधिकारी (ADM) को 'संचालन पदाधिकारी' (Conducting Officer) और उप-समाहर्ता भूमि सुधार (DCLR) को 'उपस्थापन पदाधिकारी' (Presenting Officer) के रूप में नामित किया गया था।
प्रशासनिक जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली
यह निर्णय विशेष रूप से नारायणपुर क्षेत्र से जुड़े लंबित विभागीय मामलों और भूमि संबंधी विवादों को त्वरित गति से निपटाने के लिए लिया गया था। किसी भी विभागीय कार्यवाही में दो मुख्य पक्ष होते हैं:
संचालन पदाधिकारी (Conducting Officer): इनकी भूमिका एक अर्ध-न्यायिक अधिकारी की होती है, जो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करते हैं, साक्ष्यों का परीक्षण करते हैं और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।
उपस्थापन पदाधिकारी (Presenting Officer): इनका कार्य विभागीय पक्ष को मजबूती से रखने और आवश्यक साक्ष्य व दस्तावेज संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होता है।
एडीएम को संचालन पदाधिकारी का दायित्व सौंपे जाने से यह सुनिश्चित हुआ कि मामलों की सुनवाई उच्च स्तर पर हो, जिससे निर्णय में निष्पक्षता बनी रहे। वहीं, डीसीएलआर को उपस्थापन पदाधिकारी बनाने के पीछे का तर्क यह था कि भूमि और राजस्व संबंधी मामलों की गहरी समझ होने के कारण वे तथ्यों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
निर्णय के पीछे का उद्देश्य
नारायणपुर के मामलों के लिए इस विशिष्ट व्यवस्था को लागू करने के पीछे जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य विभागीय फाइलों के निपटारे में हो रही देरी को कम करना था। 2023 के दौरान कई ऐसे प्रकरण थे जो लंबे समय से लंबित थे। इस प्रशासनिक बदलाव ने न केवल जवाबदेही तय की, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया में आने वाली अड़चनों को भी दूर किया।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बदलाव से क्षेत्रीय अधिकारियों पर निगरानी बेहतर होती है और आम जनता के कार्यों में भी तेजी आती है। स्थानीय स्तर पर इस कदम का स्वागत करते हुए इसे सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
क्षेत्रीय प्रभाव
नारायणपुर में इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद विभागीय कार्यवाहियों की गति में सुधार देखा गया। एडीएम और डीसीएलआर के स्तर पर इन नियुक्तियों से उन फाइलों पर भी काम शुरू हुआ जो वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी थीं। यह कदम सरकारी कामकाज में सुधार के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के एक मॉडल के रूप में देखा गया।
इस प्रकार की नियुक्तियाँ राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा हैं जिसके तहत प्रशासनिक स्तर पर बड़े अधिकारियों को जमीनी स्तर के मामलों के निपटारे में सीधे शामिल किया जाता है, ताकि न्याय और प्रशासन के बीच बेहतर संतुलन बना रहे।