मुजफ्फरनगर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 8 साल पुराने राजेंद्र सैनी हत्याकांड में दो दोषियों को फांसी की सजा, 1.10 लाख का जुर्माना
मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट (ADJ-3) के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 8 साल पुराने बहुचर्चित राजेंद्र सैनी हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) मानते हुए दोनों जीवित बचे दोषियों को मृत्युदंड (फांसी की सजा) दी है। साथ ही, दोनों पर 1 लाख 10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।
घटनाक्रम: क्या था पूरा मामला?
तारीख और स्थान: घटना 4 जून 2018 की है, जब ककरौली थाना क्षेत्र के रहने वाले राजेंद्र सैनी अचानक लापता हो गए थे।
अवैध संबंधों में हत्या: मुख्य आरोपी वीरसैन को शक था कि उसकी पत्नी के संबंध राजेंद्र सैनी से हैं। इसी रंजिश के तहत उसने अपने दो साथियों (गजेंद्र और रामकिरण) के साथ मिलकर राजेंद्र की हत्या की साजिश रची।
शराब पिलाकर दबाया गला: आरोपी, राजेंद्र को बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के जंगल में ले गए। वहाँ पहले उसे अत्यधिक शराब पिलाई गई और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई।
पहचान मिटाने के लिए शव को जलाया: साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से आरोपियों ने राजेंद्र के शव को एक खेत में ले जाकर आग लगा दी थी।
पुलिस जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य (DNA Test)
5 जून 2018 को मेरठ के जंगल से एक अधजला शव बरामद हुआ था। शव इस कदर जल चुका था कि उसकी पहचान करना नामुमकिन था। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य पुख्ता करने के लिए मृतक की माँ का डीएनए (DNA) टेस्ट कराया, जिससे साबित हुआ कि शव राजेंद्र सैनी का ही था। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में 8 गवाह पेश किए गए।
आरोपियों का स्टेटस: मुख्य आरोपी की हो चुकी है मौत
अभियोजन के अनुसार, इस पूरे मामले में तीन मुख्य आरोपी थे:
वीरसैन (मुख्य साजिशकर्ता): मामले की सुनवाई के दौरान ही 10 दिसंबर 2025 को जेल में इसकी मौत हो गई, जिसके बाद इसके खिलाफ मुकदमा बंद कर दिया गया था।
गजेंद्र उर्फ गीलू: कोर्ट ने दोषी करार देकर फांसी की सजा सुनाई।
रामकिरण उर्फ सावन: कोर्ट ने दोषी करार देकर फांसी की सजा सुनाई।
माननीय न्यायालय की सख्त टिप्पणी
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाते हुए कहा:
"अपराध करते समय अपराधी के मन में कानून का भय होना अत्यंत आवश्यक है। समाज में ऐसे जघन्य और क्रूर अपराधों के प्रति कड़ा संदेश जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई ऐसा करने की हिम्मत न कर सके।"