पूर्णिया के जलालगढ़ आदर्श मध्य विद्यालय में सुरक्षा की बड़ी सेंध: चहारदीवारी पूरी तरह जर्जर होने से ध्वस्त हुई व्यवस्था, चोरी और असामाजिक तत्वों के आतंक से अभिभावकों में गहरी चिंता — विस्तृत रिपोर्ट
बिहार के पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड स्थित आदर्श मध्य विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करने वाली एक बेहद गंभीर खबर सामने आई है। इस विद्यालय की चहारदीवारी (Boundary Wall) पूरी तरह से जर्जर और कई जगहों पर ध्वस्त हो चुकी है, जिसके कारण स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सुरक्षा दीवारों के अभाव और जर्जरता का फायदा उठाकर चोरों द्वारा लगातार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, साथ ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा स्कूल परिसर में आम हो गया है। इस बदतर हालात को लेकर छात्र-छात्राओं के अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष और चिंता का माहौल बना हुआ है।
जर्जर चहारदीवारी और ध्वस्त होती सुरक्षा व्यवस्था (Dilapidated Boundary Wall and Collapsing Security System)
किसी भी शिक्षण संस्थान की बुनियादी संरचना में चहारदीवारी का होना उसकी सुरक्षा और अनुशासन की पहली शर्त होती है, परंतु जलालगढ़ के इस प्रतिष्ठित आदर्श मध्य विद्यालय की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।
टूट चुकी हैं दीवारें: विद्यालय की चहारदीवारी के बड़े-बड़े हिस्से या तो पूरी तरह गिर चुके हैं या फिर इतने कमजोर हो चुके हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
खुला मैदान बना मार्ग: दीवार न होने के कारण विद्यालय परिसर एक खुले मैदान की तरह बन गया है, जहाँ से कोई भी व्यक्ति किसी भी समय आसानी से आ-जा सकता है। इससे स्कूल की संपत्ति और वहाँ पढ़ने वाले नौनिहालों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है।
चोरी की घटनाएं और असामाजिक तत्वों का आतंक (Incidents of Theft and Terror of Anti-Social Elements)
सुरक्षा दीवारों के टूटने का सीधा फायदा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों और चोरों को मिल रहा है, जिससे स्कूल का शैक्षणिक माहौल दूषित हो रहा है।
सामान की चोरी: विद्यालय परिसर और कमरों को सुरक्षित रखने का कोई साधन न होने के कारण, चोरों ने स्कूल के कई सामानों पर हाथ साफ कर दिया है। सरकारी संपत्तियों की इस तरह लगातार हो रही चोरी से विद्यालय प्रशासन भी लाचार नजर आ रहा है।
असामाजिक तत्वों का अड्डा: शाम ढलते ही यह विद्यालय परिसर असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का सुरक्षित ठिकाना बन जाता है। सुबह जब स्कूल खुलता है, तो परिसर में कई ऐसी चीजें मिलती हैं जो शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ हैं, जिससे बच्चों पर भी इसका बुरा मानसिक प्रभाव पड़ रहा है।
अभिभावकों की बढ़ती चिंता और आक्रोश (Rising Concern and Outrage Among Parents)
अपने बच्चों को रोज स्कूल भेजने वाले माता-पिता इस स्थिति को देखकर बेहद डरे और सहमे हुए हैं।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा: अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल परिसर ही सुरक्षित नहीं है, तो वहाँ पढ़ने वाले उनके बच्चे कैसे सुरक्षित रह सकते हैं? किसी भी दिन कोई बड़ी अनहोनी घटना घट सकती है, जिसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रशासन से गुहार: स्थानीय अभिभावकों और बुद्धिजीवियों ने कई बार शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे लोगों में व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
महत्वपूर्ण अवलोकन: "विद्यालय ज्ञान के मंदिर होते हैं, और यदि मंदिरों की ही सुरक्षा रामभरोसे छोड़ दी जाए, तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित कैसे रह सकता है।"
विद्यालय प्रबंधन और विभाग की उदासीनता (Apathy of School Management and Department)
इस पूरी समस्या के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से अब तक कोई गंभीर कदम न उठाया जाना प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है।
मरम्मत की दरकार: स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों का भी मानना है कि बिना चहारदीवारी के स्कूल को सुरक्षित चलाना असंभव होता जा रहा है। उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों को इस बाबत लिखित सूचना दी है, लेकिन बजट या प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में मामला फाइलों में ही अटका हुआ है।
जलालगढ़ के आदर्श मध्य विद्यालय की जर्जर चहारदीवारी और वहां पनप रही असामाजिक गतिविधियों का यह मामला शिक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते इस चारदीवारी का पुनर्निर्माण नहीं कराया गया और पुलिस गश्त नहीं बढ़ाई गई, तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह त्वरित संज्ञान लेते हुए इस पर ठोस कार्रवाई करे।