रोहतास EO विमल कुमार हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बड़े खुलासे, कठोर वस्तु से कई वार, दम घुटने और अत्यधिक रक्तस्राव से हुई मौत; SIT कई पहलुओं की जांच में जुटी

सासाराम/रोहतास। रोहतास जिले के डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) विमल कुमार की हत्या के मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच को नई दिशा दी है। चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए पोस्टमार्टम के अनुसार, ईओ की मौत कठोर एवं कुंद वस्तु से कई बार प्रहार किए जाने, दम घुटने और अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेजिक शॉक) के कारण हुई। रिपोर्ट के बाद पुलिस ने जांच और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच बहुआयामी तरीके से की जा रही है। अब तक मिले भौतिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और आरोपितों से पूछताछ के आधार पर घटनाक्रम को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, मृतक की पत्नी द्वारा अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता की आशंका जताए जाने के बाद उस पहलू की भी गहन जांच की जा रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए महत्वपूर्ण तथ्य

सासाराम में चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में कई गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, शरीर पर कठोर और कुंद वस्तु से कई बार प्रहार किए जाने के निशान मिले हैं। इसके साथ ही दम घुटने और अत्यधिक रक्तस्राव को भी मृत्यु का प्रमुख कारण बताया गया है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि मेडिकल रिपोर्ट घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों के साथ मिलकर पूरे घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नहर से बरामद लोहे की रॉड बनी जांच का अहम हिस्सा

मगध क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) विकास वैभव के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वर्णित चोटों की प्रकृति और जांच के दौरान बरामद साक्ष्यों के बीच समानता की जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार चालक मिथिलेश कुमार की निशानदेही पर गोताखोरों की मदद से पानी से भरी नहर से एक लोहे की रॉड बरामद की गई थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या यही रॉड हत्या में प्रयुक्त हुई थी। इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक जांच और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के बाद ही सामने आएगा।

चालक की गिरफ्तारी और पूछताछ

पुलिस ने मामले में चालक मिथिलेश कुमार को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान उसने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार करने संबंधी बयान दिया है। हालांकि, भारतीय कानून के तहत किसी आरोपी का अपराध न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सिद्ध माना जाता है।

पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके द्वारा दी गई जानकारी का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जा रहा है।

अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच

मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतक ईओ की पत्नी ने चालक के अलावा अन्य व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता की आशंका जताई। इसके बाद जांच एजेंसियों ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा रहा है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

आठ सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच

इस चर्चित हत्याकांड की जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। टीम में विभिन्न शाखाओं के अनुभवी पुलिस अधिकारी शामिल हैं, जो मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रहे हैं।

एसआईटी का उद्देश्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण करना और सभी संबंधित तथ्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने योग्य रूप में एकत्रित करना है।

फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

जांच में बरामद लोहे की रॉड, घटनास्थल से मिले अन्य भौतिक साक्ष्य और जैविक नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने में मदद मिलेगी कि बरामद वस्तुओं और घटनास्थल के बीच क्या संबंध है तथा उपलब्ध साक्ष्य किस हद तक एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।

पुलिस का बयान

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उसके विरुद्ध भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लोगों की निगाह जांच पर

यह मामला सामने आने के बाद रोहतास सहित पूरे बिहार में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है। स्थानीय लोग और प्रशासनिक अधिकारी जांच की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

कई सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष और शीघ्र जांच की मांग की है ताकि दोषियों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

रोहतास के डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की हत्या के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच को महत्वपूर्ण दिशा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मृत्यु कठोर एवं कुंद वस्तु से कई वार, दम घुटने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई। वहीं, चालक की निशानदेही पर बरामद लोहे की रॉड, पूछताछ और अन्य साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।

फिलहाल आठ सदस्यीय एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और मृतक की पत्नी द्वारा उठाए गए अन्य संभावित पहलुओं सहित सभी कोणों की पड़ताल की जा रही है। मामले से जुड़े अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।