नगर निगम कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से चरमराई व्यवस्था; जलनिकासी और नाला उड़ाही का कार्य पूरी तरह ठप, सड़कों पर बह रहा गंदा पानी, नारकीय बने हालात
भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के ऐतिहासिक और प्रमुख शहर भागलपुर में नगर निगम के सफाई कर्मियों और कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने एक बार फिर शहर की बुनियादी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पिछले कुछ दिनों से चल रही इस हड़ताल के कारण पूरे शहर में स्वच्छता और जनजीवन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि शहर के प्रमुख नालों की समय पर उड़ाही (सफाई) न होने के कारण गंदा और बदबूदार पानी सड़कों पर बहने लगा है। जगह-जगह जलजमाव और कचरे के बड़े-बड़े ढेरों ने शहर को नरकीय स्थिति में ला खड़ा किया है, जिससे आम नागरिकों और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है।
क्यों शुरू हुई हड़ताल? कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
नगर निगम के विभिन्न संघों और कर्मचारियों के आह्वान पर शुरू हुई इस हड़ताल के पीछे मुख्य रूप से मानदेय वृद्धि, बकाया वेतन भुगतान, दैनिक वेतनभोगियों को स्थायी करने और सेवा शर्तों से जुड़ी अन्य लंबित मांगें शामिल हैं। यूनियन के नेताओं का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम बोर्ड के अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अपनी जीविका और अधिकारों की रक्षा के लिए कर्मचारियों को अंततः काम छोड़कर हड़ताल का कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ा है।
जलनिकासी और नाला उड़ाही ठप होने से गंभीर संकट
मानसून के इस संवेदनशील दौर में जब शहर की नालियों की नियमित सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था सबसे ज्यादा दुरुस्त होनी चाहिए, ठीक उसी समय हड़ताल के कारण यह कार्य पूरी तरह से बंद पड़ा है:
उफनते नाले और सड़कों पर बहता गंदा पानी: शहर के मुख्य बाजारों, व्यस्त सड़कों और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों (जैसे खलीफाबाग, कोतवाली चौक, स्टेशन रोड, आदमपुर, और कचहरी चौक के आसपास) में नाले पूरी तरह चोक हो चुके हैं। नियमित उड़ाही न होने के कारण नालों का कचरा और गंदा पानी उफनकर सीधे मुख्य सड़कों पर बह रहा है।
संक्रामक बीमारियों का खतरा: सड़कों पर फैला गंदा पानी और जगह-जगह सड़ रहा कचरा भीषण बदबू छोड़ रहा है। मच्छरों और मक्खियों के प्रकोप के कारण शहर में मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और अन्य जलजनित संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। स्थानीय लोगों और दुकानदारों का कहना है कि इस सड़न के बीच सांस लेना भी दूभर हो गया है।
आम जनता और व्यापारियों की बढ़ी मुश्किलें
निगम कर्मियों की इस हड़ताल से सबसे अधिक परेशानी रोजमर्रा की जिंदगी बिताने वाले आम लोगों, स्कूली बच्चों और व्यापारियों को उठानी पड़ रही है:
दैनिक यात्रियों की फजीहत: सड़कों पर भरे गंदे पानी के बीच से पैदल चलना या दोपहिया वाहन चलाना किसी खतरे से खाली नहीं है। कई वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं और गंदे पानी की छींटें राहगीरों पर पड़ रही हैं।
व्यापारिक नुकसान: बाजारों में जलजमाव और गंदगी के कारण ग्राहकों का आना-जाना काफी कम हो गया है, जिससे स्थानीय दुकानदारों के व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो वे अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
प्रशासनिक खामोशी और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
हड़ताल शुरू हुए कई दिन बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन या नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस वैकल्पिक समाधान नहीं निकाला गया है। हालांकि, कुछेक स्थानों पर खानापूर्ति के लिए अमला तैनात करने की बात कही जा रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। शहर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि वह बिना देर किए हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करे और उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए काम पर लौटने का रास्ता निकाले, ताकि भागलपुर की जनता को इस नारकीय पीड़ा से मुक्ति मिल सके।