कासिमपुर गांव में खेत के पटवन के लिए बिजली का तार बिछाने को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष; लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से ताबड़तोड़ मारपीट में चार लोग गंभीर रूप से घायल, मायागंज अस्पताल रेफर

भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के गोराडीह थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुदूर ग्रामीण इलाके कासिमपुर गांव में बुधवार को खेत की सिंचाई (पटवन) के लिए बिजली का तार बिछाने को लेकर उपजा विवाद विकराल रूप ले लिया। मामूली बात से शुरू हुई कहासुनी कुछ ही मिनटों में खूनी झड़प में तब्दील हो गई, जिसमें दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चले। इस अचानक हुए हिंसक हमले में दोनों पक्षों से चार लोग गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी घायलों को पहले गोराडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुँचाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) रेफर कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला? खेत पटवन और बिजली के तार का विवाद

ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, इन दिनों कृषि कार्यों और धान की फसलों की सिंचाई के लिए खेतों तक बिजली आपूर्ति सुचारू करने का काम तेजी से चल रहा है। कासिमपुर गांव में भी कुछ किसान अपने खेतों तक बिजली का तार खींच रहे थे:

रास्ते और खेत से तार ले जाने को लेकर असहमति: बताया जा रहा है कि एक पक्ष द्वारा अपने खेत के पटवन के लिए दूसरे पक्ष की जमीन या उनके खेत के ऊपर से बिजली का तार ले जाने का प्रयास किया जा रहा था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी नोकझोक शुरू हुई।

देखते ही देखते भड़की हिंसा: बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों तरफ से लोग आक्रोशित हो गए। मौखिक विवाद कुछ ही पलों में हाथापाई और फिर सुनियोजित हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि दोनों पक्षों की ओर से लाठी, डंडे और ईंटों का इस्तेमाल किया गया, जिससे गांव में भगदड़ मच गई।

घायलों की पहचान और अस्पतालों में अफरा-तफरी

इस खूनी संघर्ष में दोनों पक्षों के कुल चार लोग गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। घायलों में मुख्य रूप से दोनों पक्षों के सदस्य शामिल हैं, जिन्हें सिर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं हैं:

गोराडीह से मायागंज रेफर: घटना के तुरंत बाद ग्रामीण व परिजनों की मदद से सभी घायलों को एम्बुलेंस और निजी वाहनों से गोराडीह स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने घायलों की प्राथमिक मरहम-पट्टी की, लेकिन सिर में गहरी चोट और अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) के कारण चारों घायलों की स्थिति नाजुक बनी हुई थी। इसे देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) रेफर कर दिया।

मायागंज अस्पताल में परिजनों की भीड़: मायागंज अस्पताल के आपातकालीन विभाग में घायलों के पहुंचते ही उनके परिजनों और शुभचिंतकों की भारी भीड़ जमा हो गई। डॉक्टरों की देखरेख में सभी घायलों का इलाज युद्धस्तर पर जारी है।

पुलिस की कार्रवाई और गांव में तनावपूर्ण शांति

घटना की सूचना मिलते ही गोराडीह थाना की पुलिस तुरंत हरकत में आई और दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुँची:

पुलिस बल की तैनाती: गांव में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति या दोबारा हिंसक झड़प को रोकने के लिए कासिमपुर गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल स्थिति पुलिस के नियंत्रण में है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अंदरूनी तनाव अभी भी बना हुआ है।

प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से आवेदन मिलने पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी। पुलिस घायलों के बयान दर्ज करने का प्रयास कर रही है और इस हिंसा में शामिल मुख्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

गोराडीह के कासिमपुर गांव में महज खेत के पटवन और बिजली के तार बिछाने जैसी छोटी बात को लेकर हुई यह खूनी झड़प इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी सहनशीलता कितनी कम होती जा रही है। एक छोटे से विवाद के कारण चार लोगों का अस्पताल पहुंचना और पूरे गांव में तनाव फैलना चिंता का विषय है। स्थानीय प्रशासन और बुद्धिजीवियों को चाहिए कि ऐसे मामलों में समय रहते मध्यस्थता करें, ताकि भविष्य में इस तरह की हिंसक घटनाओं से बचा जा सके।