राघोपुर-काजीकोरैया के लोगों के लिए राहत का दिन, तटबंध पर थमा कटाव खतरा बरकरार, जल संसाधन विभाग ने युद्धस्तर पर शुरू किया बचाव कार्य
नवगछिया : नवगछिया के राघोपुर-काजीकोरैया क्षेत्र के लोगों के लिए रविवार का दिन कुछ राहत लेकर आया। पिछले कई दिनों से लगातार कटाव की आशंका से चिंतित ग्रामीणों ने उस समय राहत की सांस ली, जब राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर रविवार को कटाव नहीं हुआ। हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और तटबंध पर खतरा अभी भी बना हुआ है। गंगा और आसपास की नदी धाराओं के दबाव के कारण प्रशासन और जल संसाधन विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
कटाव रुकने के बावजूद तटबंध के संवेदनशील हिस्से को लेकर ग्रामीणों की चिंता कम नहीं हुई है। लोगों को आशंका है कि जलस्तर और नदी की धारा में बदलाव होने पर किसी भी समय कटाव दोबारा शुरू हो सकता है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बचाव कार्य तेज कर दिया है।
युद्धस्तर पर चल रहा बचाव कार्य
नदी के कटाव से तटबंध को सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग की टीम ने युद्धस्तर पर काम शुरू किया है। संवेदनशील स्थानों पर कटावरोधी सामग्री पहुंचाई जा रही है और जरूरत के अनुसार तटबंध को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
विभागीय कर्मियों और तकनीकी टीमों की ओर से प्रभावित हिस्से की लगातार निगरानी की जा रही है। नदी की धारा किस दिशा में दबाव बना रही है और तटबंध के किस हिस्से पर खतरा अधिक है, इसका आकलन कर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों की चिंता अभी खत्म नहीं
रविवार को कटाव नहीं होने से ग्रामीणों को तत्काल राहत जरूर मिली, लेकिन खतरा बरकरार रहने के कारण लोग अभी भी आशंकित हैं। तटबंध के आसपास रहने वाले परिवारों के लिए नदी का बढ़ता दबाव चिंता का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटाव दोबारा तेज हुआ तो आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में तटबंध की सुरक्षा को लेकर विभाग को लगातार सक्रिय रहने की जरूरत है।
संवेदनशील हिस्सों पर विशेष नजर
जल संसाधन विभाग ने तटबंध के संवेदनशील हिस्सों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर निगरानी बढ़ाई है। अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में नदी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। किसी भी तरह के नए कटाव या तटबंध में दरार जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की तैयारी है।
बचाव कार्य के दौरान नदी की तेज धारा और जलस्तर को भी ध्यान में रखा जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि कमजोर हिस्सों को समय रहते मजबूत कर किसी बड़ी क्षति को रोका जा सके।
प्रशासन के लिए भी चुनौती
राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध की सुरक्षा प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। बाढ़ की स्थिति में तटबंध आसपास के गांवों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करता है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर बड़े इलाके में पानी फैलने की आशंका बढ़ सकती है।
इसी वजह से प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन और बचाव सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी भी की जा रही है।
लोगों ने मांगी स्थायी व्यवस्था
स्थानीय लोगों ने तटबंध की सुरक्षा के लिए स्थायी और मजबूत व्यवस्था की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल नदी के जलस्तर में वृद्धि के दौरान कटाव का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में केवल आपातकालीन बचाव कार्य के बजाय संवेदनशील हिस्सों में स्थायी कटावरोधी कार्य कराने की जरूरत है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि तटबंध की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी आपात स्थिति में लोगों को समय पर सूचना दी जाए।
फिलहाल मिली राहत, लेकिन निगरानी जारी
रविवार को कटाव नहीं होने से तत्काल स्थिति में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अधिकारियों के लिए अभी राहत की पूरी स्थिति नहीं है। नदी की धारा और जलस्तर में बदलाव के कारण खतरा कभी भी बढ़ सकता है।