भागलपुर के गुरहट्टा चौक को मिली नई पहचान अब 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौक' के नाम से जाना जाएगा
भागलपुर: शहर के ऐतिहासिक और व्यस्त इलाकों में शुमार 'गुरहट्टा चौक' का नाम अब बदल गया है। सोमवार को आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान, इस चौक को आधिकारिक तौर पर 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौक' के रूप में नया नाम दिया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने डॉ. मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
माल्यार्पण और भव्य समारोह
इस नामकरण समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में एक विशेष माल्यार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्थानीय मेयर और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिन्होंने इस निर्णय का स्वागत किया। चौक पर लगे नए नाम के शिलापट्ट का अनावरण करते हुए इसे शहर की एक नई सांस्कृतिक पहचान बताया गया।
देश की अखंडता के पुरोधा: डॉ. मुखर्जी
इस अवसर पर महापौर ने अपने संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनके संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे देश की अखंडता और सांस्कृतिक चेतना के महान अग्रदूत थे। उन्होंने 'एक देश, एक विधान और एक निशान' के लिए जो बलिदान दिया, वह आज भी भारत के हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मेयर ने आगे कहा, "गुरहट्टा चौक का नामकरण डॉ. मुखर्जी के नाम पर करना, उनके राष्ट्रवाद के प्रति हमारे शहर की श्रद्धा और सम्मान को दर्शाता है।"
शहर के विकास में सांस्कृतिक पहचान का महत्व
भागलपुर जैसे ऐतिहासिक शहर में इस प्रकार के नामकरण को सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि महापुरुषों के नाम पर चौक-चौराहों का नाम रखने से नई पीढ़ी को उनके इतिहास और आदर्शों के बारे में जानने का अवसर मिलता है।
इस अवसर पर स्थानीय निवासियों ने भी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि गुरहट्टा चौक शहर का एक प्रमुख केंद्र है और अब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से जुड़ने के बाद इस स्थान का गौरव और बढ़ गया है। कार्यक्रम में आए लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल नाम बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि हमें डॉ. मुखर्जी के उन विचारों को भी आत्मसात करने की आवश्यकता है जो समाज में एकता और समरसता को बढ़ावा देते हैं।
नामकरण समारोह के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए चौक के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यातायात पुलिस की तैनाती की गई थी, ताकि शहर के इस मुख्य मार्ग पर आवागमन में कोई असुविधा न हो। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।