पूर्व डीएसडब्ल्यू ने अतिथि शिक्षकों के समर्थन में खोला मोर्चा: हटाए गए शिक्षकों की बहाली और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
भागलपुर: विश्वविद्यालय परिसर में अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) की सेवा समाप्ति का मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है। इसी बीच, विश्वविद्यालय के पूर्व डीएसडब्ल्यू (DSW) ने मोर्चा खोलते हुए हटाए गए अतिथि शिक्षकों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने न केवल इन शिक्षकों की तत्काल बहाली की मांग की है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।
पूर्व डीएसडब्ल्यू का गंभीर रुख
पूर्व डीएसडब्ल्यू ने मीडिया के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि जिन अतिथि शिक्षकों ने वर्षों तक विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्तर को बनाए रखने में अपना योगदान दिया है, उन्हें अचानक और बिना ठोस आधार के हटाना पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने इसे न केवल शिक्षकों के प्रति अन्याय बताया, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा के लिए भी इसे घातक करार दिया है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चयन प्रक्रिया और सेवा विस्तार के मामलों में जो पारदर्शिता होनी चाहिए थी, उसका घोर अभाव रहा है। पूर्व डीएसडब्ल्यू ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को हटाए गए अनुभवी शिक्षकों की सूची की समीक्षा करनी चाहिए और उन्हें वापस सेवा में शामिल करना चाहिए।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
पूर्व डीएसडब्ल्यू ने अपनी नाराजगी जताते हुए उन सभी अधिकारियों और समिति के सदस्यों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं जिन्होंने इन शिक्षकों की सेवा समाप्ति का निर्णय लिया। उनके अनुसार:
पारदर्शिता का अभाव: सेवा समाप्ति के मानकों को सार्वजनिक न करना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
उत्तरदायित्व तय करना: उन्होंने कुलाधिपति (Chancellor) और उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए। यदि प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धांधली या व्यक्तिगत द्वेष पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
हटाए गए शिक्षकों का दर्द
हटाए गए अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से अल्प मानदेय पर भी पूरी निष्ठा से अध्यापन कार्य कर रहे थे। अब जब शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है, तो उन्हें हटाकर उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया गया है। पूर्व डीएसडब्ल्यू के समर्थन से इन शिक्षकों को एक नई उम्मीद जगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चहेते लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए योग्य और अनुभवी शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस घटनाक्रम के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। एक तरफ जहाँ 1 जुलाई से शिक्षण कार्य शुरू होने का आश्वासन दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी शिक्षकों के निष्कासन से उठे विरोध के सुर प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहे हैं। पूर्व डीएसडब्ल्यू के बयान के बाद छात्र संगठन भी इस मांग के समर्थन में उतर आए हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
आगे की रणनीति
पूर्व डीएसडब्ल्यू ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हटाए गए शिक्षकों को सम्मानजनक रूप से वापस नहीं लिया गया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अन्य शिक्षकों और छात्र संगठनों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्थिति में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को पंगु नहीं होने देंगे।
भागलपुर विश्वविद्यालय में अतिथि शिक्षकों का यह विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे में तब्दील होता दिख रहा है। पूर्व डीएसडब्ल्यू का खुलकर समर्थन में आना इस मामले को एक नया मोड़ देता है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस विरोध के बाद क्या रुख अपनाता है और क्या इन हटाए गए शिक्षकों को न्याय मिल पाएगा।