पप्पू सहनी हत्याकांड: मुकेश सहनी का बड़ा आरोप, कहा– 'यह फेक एनकाउंटर है, सरकार और पुलिस की मिलीभगत से दबाया जा रहा मामला'
मुजफ्फरपुर: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के सुप्रीमो और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने एक बार फिर पप्पू सहनी हत्याकांड को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखे हमले किए हैं। घटना के चार महीने बीत जाने के बावजूद दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से खफा मुकेश सहनी ने इसे 'फेक एनकाउंटर' करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह हत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसे पुलिस की मिलीभगत से दबाने की कोशिश की जा रही है।
चार महीने बाद भी न्याय का इंतजार
मुकेश सहनी ने मुजफ्फरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि पप्पू सहनी की मौत को जिस तरह से पुलिस ने एक मुठभेड़ (एनकाउंटर) का नाम दिया है, वह पूरी तरह से संदिग्ध है। उन्होंने कहा, "चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। प्रशासन का मौन यह साबित करता है कि वे दोषियों को बचाने में लगे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि जब भी किसी निर्दोष की जान जाती है, तो प्रशासन द्वारा 'एनकाउंटर' की कहानी गढ़ना एक चलन बन गया है। इस मामले में भी वही पुरानी पटकथा दोहराई गई है ताकि मामले की निष्पक्ष जांच से बचा जा सके।
सरकार और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
मुकेश सहनी ने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बदतर हो गई है। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
जांच में हीला-हवाली: घटना के इतने दिन बीतने के बाद भी किसी बड़े अधिकारी द्वारा मामले की गहन जांच नहीं की गई है।
साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़: सहनी ने आरोप लगाया कि साक्ष्यों को मिटाने या बदलने का प्रयास किया गया है ताकि असली चेहरे बेनकाब न हो सकें।
दोषियों को संरक्षण: उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण ही हत्यारे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।
न्याय न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी
मुकेश सहनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच (जैसे कि सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से) नहीं कराई और दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया, तो वीआईपी पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि वे सड़कों पर उतरेंगे और सरकार को झुकने पर मजबूर कर देंगे। उन्होंने कहा कि पप्पू सहनी की शहादत बेकार नहीं जाएगी और उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता।
पीड़ित परिवार की व्यथा
मुकेश सहनी के साथ मौजूद पीड़ित परिवार ने भी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उन्हें पुलिस से अब कोई उम्मीद नहीं बची है। परिवार का आरोप है कि पुलिस केस को कमजोर करने के लिए उन पर तरह-तरह का दबाव बना रही है। इस दौरान स्थानीय लोगों में भी काफी आक्रोश दिखा, जिन्होंने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की।
पप्पू सहनी हत्याकांड अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। मुकेश सहनी के इस आक्रामक रुख ने स्थानीय प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस मामले में कोई ठोस कदम उठाती है या फिर यह मुद्दा भविष्य में किसी बड़े जनांदोलन की नींव बनेगा। प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठना लाजिमी है, क्योंकि न्याय में देरी का मतलब अन्याय की पुष्टि जैसा है।