मुजफ्फरपुर में याद किए गए सच्चिदानंद प्रसाद: ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस ने मनाई तीसरी पुण्यतिथि, समाज सेवा को किया नमन
मुजफ्फरपुर: सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित रहने वाली संस्था 'ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस' (GKC) ने मुजफ्फरपुर के 52 बीघा मेन रोड स्थित कार्यालय में एक भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। यह आयोजन समाज के प्रखर समाजसेवी स्वर्गीय सच्चिदानंद प्रसाद की तीसरी पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अतिथियों और कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण नमन किया।
समाज सेवा के पर्याय थे सच्चिदानंद प्रसाद
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस के जिलाध्यक्ष डॉ. रविशंकर चैनपुरी ने सच्चिदानंद प्रसाद के जीवन और कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। डॉ. चैनपुरी ने उन्हें 'महान समाजसेवी' और 'संस्कृति का संरक्षक' बताया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय प्रसाद का जीवन सेवा, त्याग और परोपकार की एक जीवंत मिसाल था।
डॉ. चैनपुरी ने विशेष रूप से समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने और जरूरतमंदों की मदद करने में उनकी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तित्व सरल और सहज था, लेकिन उनके विचार हमेशा समाज के उत्थान को समर्पित रहते थे।
विवाह कार्यक्रमों और सामुदायिक उत्थान में अमूल्य योगदान
सच्चिदानंद प्रसाद के योगदानों को याद करते हुए वक्ताओं ने बताया कि वे केवल एक समाजसेवी नहीं थे, बल्कि समाज को एकजुट करने वाले एक सूत्रधार भी थे। विशेष रूप से विवाह और मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन में उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।
उन्होंने अपने जीवनकाल में ऐसे कई आयोजनों में बढ़-चढ़कर सहयोग किया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह संपन्न कराने में सुगमता हुई। डॉ. रविशंकर चैनपुरी ने कहा, "समाज में विवाह जैसे आयोजनों को सुगम और सरल बनाने के लिए उन्होंने जो पहल की थी, वह आज भी हमारे लिए अनुकरणीय है। वे गरीब कन्याओं के विवाह में स्वयं आगे बढ़कर मदद करते थे, जो उनके विशाल हृदय का परिचय देता है।"
प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे उनके विचार
पुण्यतिथि के अवसर पर वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सच्चिदानंद प्रसाद का निधन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए सेवा के पौधे आज भी समाज को छाया दे रहे हैं। उनके पदचिह्नों पर चलते हुए ही आज कायस्थ समाज नई ऊंचाइयों को छू रहा है। कार्यक्रम में मौजूद सदस्यों ने संकल्प लिया कि वे उनके बताए रास्ते पर चलेंगे और समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
कार्यक्रम में दिखी एकजुटता
इस श्रद्धांजलि सभा में कायस्थ समाज के तमाम बुद्धिजीवी, युवा और वरिष्ठ नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने उनके जीवन के उन अनकहे पहलुओं को साझा किया, जिनसे वे समाज के प्रति उनके समर्पण को देख पाए थे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए अन्य पदाधिकारियों ने भी उन्हें एक आदर्श मार्गदर्शक के रूप में याद किया।
निष्कर्ष: सच्चिदानंद प्रसाद की तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक रस्म अदायगी थी, बल्कि उनके द्वारा किए गए मानवीय कार्यों को याद करने और उनसे प्रेरणा लेने का एक माध्यम भी बना। उनकी सादगी, ईमानदारी और समाज सेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।