'या हुसैन' की गूंज से गूंजा मुजफ्फरपुर, अखाड़े के हैरतअंगेज करतबों ने रोका सांसें; छिटपुट विवादों पर पुलिस ने पाया तुरंत काबू!
उत्तर बिहार के ऐतिहासिक शहर मुजफ्फरपुर और इसके ग्रामीण इलाकों में इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की 10 तारीख यानी यौम-ए-आशूरा का पर्व बेहद पारंपरिक, शांतिपूर्ण और आपसी भाईचारे (Ganga-Jamuni Tehzeeb) के साथ मनाया गया। शुक्रवार को सुबह से ही पूरा जिला इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में डूबा रहा।
शहर के विभिन्न मोहल्लों से पारंपरिक ताजिया और अखाड़े का जुलूस निकाला गया, जो मुख्य मार्गों से होते हुए स्थानीय कर्बला मैदान पहुंचा। इस दौरान पूरा माहौल 'या हुसैन, या अली' के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। हालांकि, जुलूस के दौरान कुछ संवेदनशील मोड़ों पर दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी और विवाद की स्थिति भी बनी, लेकिन पहले से अलर्ट जिला प्रशासन और पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उपद्रवियों को खदेड़ा और मामले को शांत करा दिया।
शौर्य और कला का प्रदर्शन: अखाड़ों के जांबाज करतब
मुहर्रम के इस जुलूस का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण विभिन्न अखाड़ों के युवाओं द्वारा दिखाए गए हैरतअंगेज और पारंपरिक युद्ध कला (Martial Arts) के करतब थे। जैसे ही अखाड़ों का कारवां शहर के मुख्य चौराहों—जैसे कल्याणी चौक, सरैयागंज, कंपनी बाग और सूतापट्टी पहुंचा, वहां प्रदर्शन देख रहे हजारों लोगों की भीड़ ने तालियों से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।
लाठी और तलवारबाजी की जंग: अखाड़े के उस्तादों और छोटे-छोटे बच्चों ने हवा में इस तेजी से लाठियां और चमचमाती तलवारें भांजी कि देखने वालों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। एक साथ कई लाठियों के वार को एक ढाल पर रोकने का हुनर बेहद आकर्षक था।
आग के गोलों से अठखेलियां: शाम ढलते ही कई जांबाज युवाओं ने हवा में जलते हुए आग के गोले (बनेठी) घुमाकर आग के हैरतअंगेज पैटर्न बनाए। इस खतरनाक स्टंट को बेहद सधे हुए अंदाज और पूरी सुरक्षा के साथ अंजाम दिया गया।
ट्यूबलाइट और नारियल स्टंट: कुछ युवाओं ने अपनी छाती और पीठ पर ट्यूबलाइट फोड़कर और आंखों पर पट्टी बांधकर तलवार से नारियल काटने के जांबाज स्टंट दिखाए, जिसे देख लोग दंग रह गए।
आपसी भाईचारे की मिसाल: जब हिंदू भाइयों ने पिलाया शरबत
मुजफ्फरपुर का मुहर्रम हमेशा से अपनी कौमी एकता के लिए जाना जाता है। इस बार भी शुक्रवार को चिलचिलाती धूप और उमस के बीच शहर की गंगा-जमुनी तहजीब साफ देखने को मिली:
सड़कों के किनारे कई जगहों पर हिंदू समाज के लोगों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पंडाल लगाकर जुलूस में शामिल अकीदतमंदों और खिलाड़ियों के लिए ठंडे पानी, नींबू पानी और मीठे शरबत का इंतजाम किया हुआ था।
कई जगहों पर पूजा समितियों और राजनीतिक नेताओं ने अखाड़े के खलीफाओं (प्रमुखों) को अंगवस्त्र और पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। बुजुर्गों का कहना था कि यह त्योहार भले ही एक समुदाय विशेष का हो, लेकिन इमाम हुसैन की शहादत जुल्म के खिलाफ थी, इसलिए इसमें हर धर्म का इंसान अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है।
एक नज़र में: मुजफ्फरपुर मुहर्रम रूट और सुरक्षा व्यवस्था
| मुख्य पहलू | प्रशासनिक और जमीनी आंकड़े |
|---|---|
| प्रमुख मार्ग | सिकंदरपुर, चंदवारा, मिठनपुरा, कल्याणी से टाउन थाना रोड होते हुए कर्बला |
| ताजिया की बनावट | थर्मोकोल, कांच, रंग-बिरंगी पन्नियों से बने गगनचुंबी ताजिया |
| प्रशासनिक मुस्तैदी | 150 से अधिक स्थानों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती |
| निगरानी का तरीका | ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी और सादे लिबास में स्पेशल विंग |
कुछ स्थानों पर बिगड़ा माहौल, लेकिन खाकी ने दिखाया 'एक्शन'
शुक्रवार को जहां एक तरफ पूरा जिला शांति और अकीदत के रंग में रंगा था, वहीं कुछ शरारती तत्वों ने माहौल को सांप्रदायिक रंग देने और तनाव फैलाने की नाकाम कोशिश भी की।
पहला विवाद: ग्रामीण इलाके में रूट को लेकर बहस
मुजफ्फरपुर के एक ग्रामीण प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गांव में जुलूस का रास्ता बदलने को लेकर दो पक्षों के युवा आपस में उलझ गए। देखते ही देखते दोनों तरफ से नारेबाजी शुरू हो गई और पत्थरबाजी की नौबत आने वाली थी।
पुलिस का त्वरित रिस्पॉन्स:
घटना की भनक मिलते ही संबंधित थाने की पुलिस और क्विक रिस्पांस टीम (QRT) के जवान भारी संख्या में मौके पर पहुंचे। पुलिस ने लाठियां चटकाकर हुड़दंग कर रहे युवाओं को तितर-बितर किया। स्थानीय शांति समिति के सदस्यों को बुलाकर मौके पर ही दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराई गई और पुराने तय रूट से ही शांतिपूर्वक जुलूस को आगे रवाना किया गया।
दूसरा विवाद: डीजे बजाने पर तकरार
शहर के एक संवेदनशील मोड़ के पास प्रशासन के आदेश का उल्लंघन कर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा प्रतिबंधित डेसिबल का डीजे बजाया जा रहा था, जिसपर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताई। इसे लेकर दोनों तरफ से तनाव बढ़ गया। मौके पर तैनात स्टैटिक मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए डीजे को जब्त कर लिया और आयोजकों को सख्त चेतावनी देकर मामले को शांत कराया।
अभेद्य सुरक्षा घेरा: ड्रोन और सोशल मीडिया पर थी पैनी नजर
मुजफ्फरपुर के जिला अधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मुहर्रम को लेकर खुद पूरी रात और दिन भर सड़कों पर गश्त करते नजर आए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया था:
ड्रोन कैमरों से छतों की निगरानी: संवेदनशील इलाकों और संकरी गलियों में ड्रोन उड़ाकर छतों की निगरानी की जा रही थी ताकि कहीं भी पत्थर या आपत्तिजनक सामान इकट्ठा न किया जा सके।
सोशल मीडिया सेल अलर्ट: पुलिस के साइबर विंग ने साफ कर दिया था कि मुहर्रम के जुलूस या छिटपुट विवादों को लेकर भ्रामक पोस्ट या वीडियो शेयर करने वालों को सीधे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। इस डर से अफवाह फैलाने वालों के हौसले पस्त रहे।
शाम को कर्बला में ठंडे हुए ताजिया
जैसे-जैसे सूरज ढला, अखाड़ों और ताजिया का कारवां अपने अंतिम गंतव्य यानी स्थानीय कर्बला मैदानों की ओर बढ़ने लगा। अकीदतमंदों ने नम आंखों से हजरत इमाम हुसैन को याद किया और मन्नतें मांगी। जिन लोगों की मन्नतें पूरी हुई थीं, उन्होंने ताजिया पर मलाई, सेहरा और चादरपोशी की। देर शाम धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सभी ताजिया को सुपुर्द-ए-खाक (ठंडा) किया गया, जिसके साथ ही 10 दिनों से चल रहा मुहर्रम का यह पर्व संपन्न हो गया।
मुजफ्फरपुर में शुक्रवार को मनाया गया मुहर्रम का त्योहार कुछ असामाजिक तत्वों की छोटी हरकतों के बावजूद प्रशासन की सूझबूझ और आम जनता के समझदार रवैए के कारण शांति की मिसाल बन गया। छिटपुट विवादों को समय रहते दबाकर पुलिस ने यह साबित कर दिया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं है। अंततः, नफरत हार गई और मुजफ्फरपुर का पारंपरिक भाईचारा एक बार फिर जीत गया।