सुल्तानगंज में गूंजे 'बम-बम भोले' के जयकारे; पटना सिटी से आया 54 फीट लंबा भव्य कांवर आकर्षण का केंद्र, गंगा में डुबकी लगाकार कांवरियों ने किया जल संकल्प
विशेष संवाददाता, सुल्तानगंज/भागलपुर: पवित्र श्रावण मास के पावन आगमन के साथ ही उत्तर बिहार का प्रसिद्ध तीर्थ शहर सुल्तानगंज पूरी तरह से शिवमय और भक्ति के रंगों में रंग चुका है। देवघर (बाबानगर) जाने वाले श्रद्धालुओं यानी कांवरियों के जत्थों का तांता लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को सुल्तानगंज के प्रसिद्ध उत्तरवाहिनी गंगा तट पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राजधानी पटना के पटना सिटी क्षेत्र से आए एक उत्साही और निष्ठावान कांवरिया जत्था ने लगभग 54 फीट लंबा विशालकाय कांवर लेकर सुल्तानगंज की पावन धरा पर प्रवेश किया। इस अद्भुत और भव्य कांवर को देखने के लिए स्थानीय लोगों और अन्य श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
गंगा तट पर आस्था का महाकुंभ: जल संकल्प और स्नान
श्रावणी मेले के दौरान उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान करने और बाबा बैद्यनाथ को चढ़ाने के लिए जल उठाने का विशेष महत्व है। पटना सिटी से आए इस जत्थे के सदस्यों ने सबसे पहले मां गंगा के पावन जल में आस्था की डुबकी लगाई और इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ विधिवत जल संकल्प किया:
मंत्रोच्चार के बीच संकल्प: पुरोहितों के सान्निध्य में कांवरियों ने हर-हर गंगे और ओम नमः शिवाय के जयकारों के बीच अपनी कठिन यात्रा के सफल होने की प्रार्थना की।
54 फीट लंबे कांवर की विशेषता: इस जत्थे द्वारा लाया गया 54 फीट का यह विशाल कांवर आधुनिक कला और पारंपरिक शिल्पकला का एक बेहतरीन नमूना था। इसे रंग-बिरंगे फूलों, लाइटों और धार्मिक प्रतीकों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था। इतने बड़े और भारी कांवर को कंधे पर उठाकर चलना किसी साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं है, लेकिन इन शिव भक्तों की अटूट आस्था और जोश ने इसे संभव कर दिखाया।
15 वर्षों का अटूट क्रम: पिछले डेढ़ दशक से जारी है यह कठिन यात्रा
इस विशेष कांवरिया जत्थे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कोई पहली बार ऐसी यात्रा नहीं कर रहा है, बल्कि इस जत्थे के सदस्य पिछले 15 वर्षों से लगातार इस कठिन पदयात्रा को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं:
साधना और समर्पण: जत्थे के मुख्य सदस्यों ने बातचीत में बताया कि वे पिछले 15 सालों से हर साल श्रावण मास में पटना सिटी से सुल्तानगंज आते हैं और यहां से गंगाजल भरकर बाबाधाम की लंबी पदयात्रा शुरू करते हैं।
4 दिनों की कठिन पदयात्रा: सुल्तानगंज से देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम) तक की लगभग 105 किलोमीटर की यह दूरी यह जत्था पैदल तय करता है। आमतौर पर वे इस कठिन मार्ग को महज 4 दिनों में पूरा कर लेते हैं। इतनी कम अवधि में इतने बड़े कांवर के साथ 105 किमी की पदयात्रा करना उनकी उच्च शारीरिक क्षमता और भगवान भोलेनाथ के प्रति अगाध प्रेम का प्रमाण है।
मेले में उमड़ा जनसैलाब और प्रशासनिक तैयारियां
श्रावणी मेले के पहले सप्ताह में ही सुल्तानगंज से लेकर कांवरिया पथ तक भक्तों का रेला उमड़ पड़ा है:
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था: जिला प्रशासन और पुलिस महकमा भी मेले को लेकर पूरी तरह सतर्क है। उत्तरवाहिनी गंगा घाट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। गोताखोरों और एनडीआरएफ की टीमों को भी मुस्तैद रखा गया है।
स्थानीय लोगों में उत्साह: पटना सिटी के इस जत्थे के आगमन से सुल्तानगंज के स्थानीय दुकानदारों और पंडा समाज में भी विशेष उत्साह देखा गया। लोगों ने जगह-जगह कांवरियों का स्वागत किया और उन्हें सेवा प्रदान की।
सुल्तानगंज में श्रावणी मेले के दौरान दिखा यह नजारा सनातन संस्कृति की उस अटूट परंपरा और जीवंत आस्था का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपनी तमाम कठिनाइयों को भूलकर केवल शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। पटना सिटी के इस कांवरिया जत्थे द्वारा 54 फीट के कांवर के साथ शुरू की गई यह 15 साल पुरानी परंपरा न केवल आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी, बल्कि यह साबित करती है कि सच्ची श्रद्धा और दृढ़ संकल्प के आगे बड़ी से बड़ी दूरी भी छोटी पड़ जाती है।