तीन माह में 104 लोगों ने सड़क हादसों में गंवाई जान, निर्माणाधीन फोरलेन बना काल का ग्रास
सुल्तानगंज (भागलपुर): भागलपुर के सुल्तानगंज और उसके आसपास के क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ चिंताजनक स्तर तक बढ़ गया है। सरकारी आंकड़ों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले तीन महीनों में यह क्षेत्र हादसों की एक भयावह श्रृंखला का गवाह बना है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में 25, मई में 30 और जून के महीने में 49 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। महज 90 दिनों के भीतर कुल 104 लोगों की मौत ने पूरे प्रशासन और स्थानीय निवासियों को झकझोर कर रख दिया है।
निर्माणाधीन फोरलेन: हादसों का केंद्रबिंदु
इस बेतहाशा बढ़ती मौतों के पीछे सबसे बड़ा कारण सुल्तानगंज से गुजरने वाली निर्माणाधीन फोरलेन परियोजना को माना जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी हो रही है। सड़क के बीचों-बीच छोड़े गए गड्ढे, बिना किसी चेतावनी बोर्ड के निर्माण सामग्री का ढेर, और रात के समय प्रकाश व्यवस्था (street lighting) का अभाव इन हादसों को खुला निमंत्रण दे रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क अभी अधूरी है, लेकिन बड़े वाहन और ट्रक इस पर बेरोकटोक और तेज गति से दौड़ रहे हैं। कई स्थानों पर डायवर्जन के संकेत न होने के कारण गलत दिशा से आने वाले वाहनों की आमने-सामने की टक्कर (head-on collision) का खतरा हर पल बना रहता है।
लापरवाही की एक लंबी फेहरिस्त
हादसों के बढ़ते आंकड़ों के पीछे प्रशासनिक सुस्ती भी एक बड़ा कारक है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क किनारे अतिक्रमण और अवैध कट (illegal cuts) ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
तेज रफ्तार का कहर: बेलगाम भारी वाहन और डंपर सड़क की सुरक्षा की परवाह किए बिना दौड़ रहे हैं।
संकेतकों का अभाव: रात के अंधेरे में निर्माणाधीन हिस्सों पर न तो रिफ्लेक्टर लगे हैं और न ही डाइवर्जन की चेतावनी देने वाले कोई बोर्ड हैं।
प्रशासनिक उदासीनता: स्थानीय पुलिस की गश्त और ट्रैफिक मैनेजमेंट की कमी के कारण सड़क पर अराजक स्थिति बनी रहती है।
बढ़ती मौतों का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
तीन महीनों में 104 लोगों की असमय मौत ने कई परिवारों को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। इनमें से अधिकांश पीड़ित युवा और परिवार के कमाने वाले सदस्य थे। 'सड़क सुरक्षा' केवल कागजों तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि हर दिन किसी न किसी परिवार का चिराग बुझ रहा है।
जब इस संबंध में स्थानीय प्रशासन से सवाल किया गया, तो उन्होंने सड़क निर्माण करने वाली कंपनी (NHAI के ठेकेदार) को सुरक्षा उपाय दुरुस्त करने के कड़े निर्देश देने की बात कही। साथ ही, खतरनाक बिंदुओं (black spots) की पहचान कर वहां बैरिकेडिंग और स्पीड ब्रेकर लगाने का आश्वासन दिया गया है।
हालांकि, सवाल यह है कि 104 जिंदगियां खोने के बाद प्रशासन की यह नींद कब तक खुलेगी? स्थानीय लोग अब जिलाधिकारी से मांग कर रहे हैं कि निर्माण कार्य पूरा होने तक इस सड़क पर भारी वाहनों के परिचालन को सीमित किया जाए और सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती की जाए।
सुल्तानगंज में सड़क का निर्माण विकास के लिए हो रहा है या विनाश के लिए? यह सवाल अब जनता की जुबान पर है। यदि समय रहते सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए गए और सड़कों पर नियम लागू नहीं हुए, तो आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और भी भयावह हो सकता है।