विजिलेंस कोर्ट का कड़ा फैसला; रिश्वतखोर राजस्व लिपिक अशोक पासवान को 2 साल की सश्रम कारावास
भागलपुर: भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कानूनी मुहिम में विजिलेंस कोर्ट (सतर्कता अदालत) को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। भागलपुर की विशेष विजिलेंस अदालत ने मंगलवार को एक पुराने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए राजस्व लिपिक (Revenue Clerk) अशोक पासवान को दोषी करार दिया। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत दोषी पाए गए लिपिक को दो साल के सश्रम कारावास और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला करीब 19 साल पुराना है, जो विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (VIB) द्वारा 2007 में दर्ज किया गया था। आरोपी अशोक पासवान, जो उस समय मुंगेर जिले के अंचल हवेली खड़गपुर में राजस्व लिपिक के पद पर तैनात थे, पर घूस लेने का आरोप लगा था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 12 जुलाई 2007 को विजिलेंस की टीम ने एक जाल बिछाया था। शिकायतकर्ता से काम के बदले 1,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए लिपिक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद से ही मामला अदालत में लंबित था, जिस पर अब फैसला सुनाया गया है।
सजा का विवरण
विजिलेंस कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि:
सश्रम कारावास: दोषी अशोक पासवान को दो साल की कड़ी जेल की सजा भुगतनी होगी।
जुर्माना: अदालत ने उन पर 10,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अतिरिक्त सजा: यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा करने में विफल रहता है, तो उसे एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की बड़ी जीत
इस फैसले ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर चोट की है। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, यह इस वर्ष 2026 में विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों में मिली 10वीं सजा (Conviction) है। अदालती कार्यवाही के दौरान बचाव पक्ष और विजिलेंस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने लिपिक को भ्रष्टाचार का दोषी पाया।
कानूनी और प्रशासनिक प्रभाव
यह सजा उन सरकारी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जनता के काम के बदले अवैध रूप से धन की मांग करते हैं। हालांकि, इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली, लेकिन अंततः कोर्ट ने सबूतों के आधार पर दोषी को कानून के दायरे में लाया। जानकारों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में इस तरह की त्वरित और ठोस सजा से विभाग में ईमानदारी के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ता है।
फिलहाल, फैसला आने के बाद दोषी को हिरासत में ले लिया गया है और आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।