गुलाम रसूल लेन में बूंद-बूंद को तरस रहे लोग; बुडको की लचर व्यवस्था से जल संकट गहराया, जर्जर सड़कें और जाम नाले से जीना मुहाल
भागलपुर: स्मार्ट सिटी का तमगा पाने वाले भागलपुर की जमीनी हकीकत का एक बदरंग चेहरा गुलाम रसूल लेन में देखने को मिल रहा है। यहां के निवासियों के लिए 'पानी' अब किसी विलासिता से कम नहीं रह गया है। पिछले कई दिनों से क्षेत्र में गहराए जल संकट ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बुडको (BUDCO) की लचर कार्यप्रणाली के कारण जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे स्थानीय लोग भारी आक्रोश में हैं।
एक प्याऊ, घंटों की कतार और बूंद-बूंद का संघर्ष
क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि पाइपलाइन के जरिए होने वाली जलापूर्ति लगभग ठप पड़ी है। पूरे मोहल्ले की प्यास बुझाने का इकलौता जरिया अब एक मात्र सार्वजनिक प्याऊ (पब्लिक स्टैंड पोस्ट) रह गया है। सुबह होते ही यहां पानी भरने वालों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जो कभी-कभी घंटों तक चलती हैं।
एक स्थानीय निवासी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "पानी के लिए रोज सुबह से ही धक्का-मुक्की और तू-तू मैं-मैं शुरू हो जाती है। घर के काम हों या बच्चों को स्कूल भेजना, सब कुछ पानी की इस कतार पर निर्भर हो गया है। बुडको के अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन धरातल पर समाधान शून्य है।"
दोगुनी मार: जर्जर सड़कें और बजबजाते नाले
जल संकट के अलावा, गुलाम रसूल लेन की बदहाल बुनियादी ढांचा समस्याओं को और गंभीर बना रहा है। मोहल्ले की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। जगह-जगह गड्ढे होने के कारण मामूली बारिश में ही यहां चलना जोखिम भरा हो जाता है।
इसके साथ ही, नालों की सफाई न होने से समस्या का अंबार लग गया है। नालों का कचरा और गंदा पानी अक्सर सड़कों पर बहता रहता है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैली हुई है। जलजमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम का सफाई दस्ता लंबे समय से इस क्षेत्र की ओर नहीं आया है।
प्रशासनिक उदासीनता पर भड़के लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार पार्षद से लेकर नगर निगम और बुडको कार्यालय तक गुहार लगाई है, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन मिले हैं। लोग पूछते हैं कि जब टैक्स पूरा वसूला जाता है, तो मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं?
गुलाम रसूल लेन के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस क्षेत्र को 'क्रिटिकल जोन' घोषित कर तत्काल प्रभाव से पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
आगे की राह क्या?
जर्जर सड़कें और जाम नाले शहर के विकास के दावों की पोल खोल रहे हैं। फिलहाल, गुलाम रसूल लेन की जनता गर्मी और पानी की किल्लत के बीच भगवान भरोसे है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस समस्या का संज्ञान लेकर स्थानीय लोगों को इस नारकीय जीवन से निजात दिलाता है।