आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी की प्रेरणादायक कहानी
सफलता की परिभाषा सिर्फ 'जीत' नहीं, बल्कि 'लड़ते रहने' का नाम है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्तित्व की कहानी बता रहे हैं, जो यह साबित करती है कि यदि आपमें दृढ़ संकल्प हो, तो आप न केवल अपनी असफलता को पीछे छोड़ सकते हैं, बल्कि उसी सिस्टम का हिस्सा बनकर उसे दिशा भी दे सकते हैं जिसने कभी आपको अस्वीकार कर दिया था।
यह कहानी है आईआईटी मद्रास के वर्तमान निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी (Prof. V. Kamakoti) की।
एक दर्दनाक शुरुआत: जब 'JEE' ने रिजेक्ट किया
प्रोफेसर वी. कामकोटी के करियर की शुरुआत एक ऐसे मोड़ से हुई, जिससे लाखों छात्र गुजरते हैं—आईआईटी प्रवेश परीक्षा (JEE)। कामकोटी ने बड़े सपने देखे थे और कड़ी मेहनत की थी, लेकिन उस साल उनका चयन नहीं हो पाया। जिस परीक्षा को उन्होंने अपने भविष्य का आधार माना था, उसी ने उन्हें 'अयोग्य' करार दिया।
"उस वक्त ऐसा लगा जैसे सब कुछ खत्म हो गया। एक छात्र के लिए यह स्वीकार करना बहुत कठिन होता है कि जिस संस्थान में वह जाना चाहता था, उसी ने उसे रिजेक्ट कर दिया है।"
हार नहीं मानी: नया रास्ता चुना
JEE में असफलता के बावजूद, कामकोटी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को एक नई दिशा दी। उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और धीरे-धीरे कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उनकी बुद्धिमत्ता और तकनीकी कौशल का लोहा दुनिया ने माना। वे न केवल एक बेहतरीन शिक्षक बने, बल्कि भारत के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में गिने जाने लगे।
चक्र पूरा हुआ: 'रिजेक्ट' करने वाले संस्थान के निदेशक बने
किस्मत का खेल देखिए, वर्षों बाद वही संस्थान—आईआईटी मद्रास—जिसने उन्हें एक छात्र के रूप में रिजेक्ट किया था, उन्हें ही अपना 'निदेशक' (Director) बनाने का फैसला किया।
प्रोफेसर कामकोटी की शैक्षणिक उत्कृष्टता और प्रशासनिक क्षमता के चलते उन्हें आईआईटी मद्रास का नेतृत्व सौंपने का निर्णय लिया गया। यह एक ऐसा पल था जब असफलता और सफलता का चक्र पूरी तरह से घूम गया था।
नियति का न्याय: JEE के चेयरमैन के रूप में वापसी
प्रोफेसर कामकोटी केवल निदेशक ही नहीं बने, बल्कि उन पर JEE (Joint Entrance Examination) के चेयरमैन की बड़ी जिम्मेदारी भी आई।
ऐतिहासिक संयोग: जो छात्र कभी JEE पास नहीं कर पाया था, वही अब उस पूरी परीक्षा प्रक्रिया की देखरेख करने वाला 'चेयरमैन' था।
बड़ा बदलाव: उन्होंने अपनी अध्यक्षता के दौरान परीक्षा को और अधिक पारदर्शी और छात्र-अनुकूल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए।
छात्रों के लिए सबक: असफलता अंत नहीं है
प्रोफेसर वी. कामकोटी की कहानी उन सभी छात्रों के लिए एक आईना है जो परीक्षाओं में असफल होने पर तनाव में आ जाते हैं या गलत कदम उठा लेते हैं।
दृष्टिकोण बदलें: असफलता यह नहीं बताती कि आप योग्य नहीं हैं, बल्कि यह बताती है कि आपको तैयारी या दिशा बदलने की जरूरत है।
सिस्टम को बदलें: यदि सिस्टम आपको मौका नहीं देता, तो खुद को इतना काबिल बनाएं कि कल आप खुद उस सिस्टम का नेतृत्व करें।
निरंतरता: कामकोटी का जीवन यह सिखाता है कि महान उपलब्धियां एक परीक्षा में पास या फेल होने से नहीं, बल्कि जीवन भर सीखने की इच्छा रखने से मिलती हैं।
आज प्रोफेसर वी. कामकोटी आईआईटी मद्रास को भविष्य की ओर ले जा रहे हैं। उनका सफर हमें याद दिलाता है कि "एक परीक्षा कभी भी किसी के भविष्य का निर्धारण नहीं कर सकती।" जो लोग खुद को शून्य से शिखर तक ले जाने का माद्दा रखते हैं, उनके लिए दुनिया की कोई भी दीवार इतनी ऊंची नहीं कि वे उसे पार न कर सकें।