श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं के बीच सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की अनूठी पहल; कांवरिया मार्ग पर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से 'सतत जीविकोपार्जन' और 'वृद्धजन पेंशन योजना' की दी जा रही विस्तृत जानकारी

भागलपुर, विशेष संवाददाता: देवघर और सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाने वाले मार्ग पर इन दिनों आस्था का सैलाब उमड़ा हुआ है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के इस पावन अवसर पर जहां एक ओर शिवभक्तों की लंबी कतारें नजर आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) श्रद्धालुओं को धार्मिक माहौल के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का एक बेहद अनूठा और सराहनीय प्रयास कर रहा है। मेले के विभिन्न प्रमुख पड़ावों, धर्मशालाओं और विश्राम स्थलों पर विशेष रूप से आयोजित किए जा रहे नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से कांवरियों और आम जनता को राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं—विशेषकर 'सतत जीविकोपार्जन कार्यक्रम' और 'मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना' के बारे में बेहद सरल, सहज और रोचक अंदाज में जागरूक किया जा रहा है।

नुक्कड़ नाटकों के जरिए कांवरियों के बीच गूंज रही विकास की बातें

श्रावणी मेले की इस भागदौड़ और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच कलाकारों की टोलियां अपनी कला के माध्यम से समाज सुधार और आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश दे रही हैं:

रोचक प्रस्तुति से बंध रहा समां: मेला क्षेत्र में जब कलाकारों द्वारा ढोल-मंजीरे और पारंपरिक संगीत के साथ नुक्कड़ नाटक का मंचन शुरू होता है, तो वहां से गुजरने वाले कांवरिया और स्थानीय लोग रुककर इसे देखने के लिए विवश हो जाते हैं। नाटक की भाषा इतनी सरल और मनोरंजक है कि दर्शक पूरी तन्मयता के साथ कलाकारों के संवादों से जुड़ते हैं।

भक्तों को मिल रही दोहरी जानकारी: कांवरियों का कहना है कि कठिन और लंबी पैदल यात्रा के दौरान इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से न केवल उनकी मानसिक थकान दूर होती है, बल्कि उन्हें सरकार की उन योजनाओं की भी बारीक जानकारी मिल जाती है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव ला रही हैं।

सतत जीविकोपार्जन योजना: अति गरीबों की बदलती तकदीर का सजीव चित्रण

नाटक की मुख्य कथावस्तु में बिहार सरकार की अति महत्वाकांक्षी 'सतत जीविकोपार्जन योजना' को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया है:

पारंपरिक कुटीर व्यवसायों से मुक्ति और सम्मानजनक आजीविका: कलाकारों ने मंचन के जरिए यह बहुत ही मार्मिक रूप से दर्शाया कि कैसे यह योजना समाज के उन अत्यंत गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो पहले ताड़ी बेचने या अन्य जोखिम भरे पारंपरिक कार्यों से जुड़े थे। सरकार उन्हें वैकल्पिक और गरिमापूर्ण रोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

आर्थिक सहायता और हुनर का प्रशिक्षण: नाटक के दृश्यों के माध्यम से यह समझाया गया कि योजना के तहत सरकार किस प्रकार गरीब परिवारों को चिह्नित कर उन्हें स्वरोजगार के लिए वित्तीय अनुदान, जीविकोपार्जन के साधन और कौशल प्रशिक्षण देती है, जिससे ग्रामीण अंचलों में महिलाएं और पुरुष आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना: बुढ़ापे का मजबूत और सुरक्षित सहारा

बुजुर्गों के सामाजिक सम्मान और वित्तीय सुरक्षा को केंद्रित करते हुए 'मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना' का मंचन भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा:

60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत: कलाकारों ने संवादों के जरिए श्रद्धालुओं को बताया कि बिहार का कोई भी वृद्ध नागरिक अब बेसहारा नहीं है। इस योजना के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी पात्र बुजुर्गों को बिना किसी जटिल आय सीमा के नियमित रूप से पेंशन राशि प्रदान की जा रही है।

डीबीटी (DBT) के माध्यम से पारदर्शी भुगतान: नाटक में यह भी स्पष्ट किया गया कि कैसे आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए यह पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के आधार-सृजित (Aadhaar-linked) बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

श्रद्धालुओं और प्रबुद्ध जनों ने की इस पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की इस रचनात्मक पहल को मेला क्षेत्र में भारी सराहना मिल रही है:

जागरूकता का सशक्त माध्यम: शिविरों में मौजूद प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि मेलों और सांस्कृतिक उत्सवों का उपयोग यदि इस प्रकार जन-कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए किया जाए, तो उसका प्रभाव दूरगामी होता है। सुदूर गांवों से आए लोग इन योजनाओं की जानकारी पाकर अपने घर-परिवार के पत्र पात्र लोगों को इसका लाभ दिलाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

प्रशासनिक संवाद में नयापन: कांवरियों ने भी माना कि इस तरह के आयोजनों से शासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है और सरकार की नीतियां सीधे आम आदमी तक पहुंचती हैं।

श्रावणी मेले के पावन अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित ये नुक्कड़ नाटक इस बात के परिचायक हैं कि लोक-कलाओं का उपयोग किस प्रकार समाज के उत्थान और जनजागरण के लिए किया जा सकता है। 'सतत जीविकोपार्जन' और 'वृद्धजन पेंशन योजना' जैसी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जब कलाकारों ने शिवभक्तों के बीच प्रस्तुत की, तो उसने न केवल मेले के धार्मिक स्वरूप को एक सामाजिक आयाम दिया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि विकास और आस्था एक-साथ आगे बढ़ सकते हैं।