बिहार में टमाटर की महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट: भागलपुर में रिकॉर्ड स्तर पर कीमतें, मानसून की दस्तक से आपूर्ति प्रभावित
पटना/भागलपुर: बिहार में मानसून के आगमन के साथ ही हरी सब्जियों के दाम, विशेषकर टमाटर की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में टमाटर आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है। भागलपुर के खुदरा बाजारों में टमाटर की कीमतें ₹55 से ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जो राज्य की राजधानी पटना के बाजारों की तुलना में काफी अधिक हैं। इस महंगाई ने न केवल मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट को प्रभावित किया है, बल्कि गृहिणियों की परेशानी भी बढ़ा दी है।
आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और मानसून का असर
टमाटर की कीमतों में इस अचानक आई तेजी के पीछे मुख्य कारण मानसून की शुरुआती बारिश और परिवहन में आ रही बाधाएं हैं। कृषि विशेषज्ञों और सब्जी व्यापारियों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण फसलों की कटाई और मंडियों तक माल पहुंचाने में भारी मुश्किल हो रही है। बारिश के कारण खेत में ही टमाटर खराब हो रहे हैं, जिससे बाजार में ताजी और अच्छी गुणवत्ता वाली उपज की आवक (Supply) में कमी आई है।
भागलपुर जैसे शहरों में, जहां आसपास के क्षेत्रों से आपूर्ति थोड़ी बाधित होती है, कीमतें तेजी से ₹60 के आंकड़े को छू रही हैं। वहीं, पटना के बाजारों में आपूर्ति श्रृंखला अपेक्षाकृत बेहतर होने के कारण भाव ₹50-₹60 की सीमा में बने हुए हैं, लेकिन वहां भी पिछले कुछ हफ्तों के मुकाबले कीमतों में दोगुने के करीब का उछाल देखा गया है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में इस उछाल के कई कारण हैं:
फसल का खराब होना: भारी गर्मी के बाद मानसून की अचानक बारिश ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया है, जिससे आवक कम हुई है।
परिवहन में देरी: बारिश के कारण सड़कों पर जलजमाव और मालवाहक वाहनों की आवाजाही में देरी होने से ढुलाई का खर्च बढ़ गया है।
मांग और आपूर्ति का असंतुलन: मांग लगातार बनी हुई है, लेकिन आपूर्ति में कमी के कारण खुदरा विक्रेता मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
स्थानीय भंडारण की कमी: टमाटर एक जल्दी खराब होने वाली (perishable) सब्जी है। स्थानीय स्तर पर कोल्ड स्टोरेज की सुविधाओं के अभाव में व्यापारी स्टॉक जमा नहीं कर पाते, जिससे आपूर्ति की स्थिति अस्थिर रहती है।
आम उपभोक्ता परेशान
बाजार में टमाटर खरीदने पहुंचे ग्राहकों का कहना है कि रसोई में सलाद से लेकर सब्जी तक हर जगह टमाटर का उपयोग होता है, लेकिन मौजूदा कीमतों के कारण अब उन्हें इसकी मात्रा कम करनी पड़ रही है। भागलपुर के स्थानीय खरीदारों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में कीमतों में अचानक ₹20-₹25 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनका साप्ताहिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
आगे क्या हो सकता है?
थोक व्यापारियों का मानना है कि जब तक मानसून की स्थिति सामान्य नहीं होती और अन्य राज्यों (जैसे महाराष्ट्र और दक्षिण भारत) से नई फसल की आवक पूरी तरह शुरू नहीं हो जाती, तब तक कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार कीमतों पर निगरानी रख रही है, लेकिन मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण तत्काल राहत पाना चुनौतीपूर्ण है।
आने वाले दिनों में यदि बारिश का क्रम जारी रहा, तो अन्य मौसमी सब्जियों के दाम भी और बढ़ सकते हैं। फिलहाल, आम आदमी को अपनी थाली का स्वाद कम करने या जेब पर अधिक बोझ उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।