जाम से मुक्ति के लिए प्रशासन का वैकल्पिक प्लान

भागलपुर: उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली जीवन रेखा 'विक्रमशिला सेतु' इन दिनों मरम्मत कार्य और क्षति के कारण भारी दबाव झेल रही है। पुल के एक स्लैब के क्षतिग्रस्त होने के बाद से ही भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन एक बड़ी चुनौती बन गया है। सेतु पर लगने वाले घंटों के जाम से निजात दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने अब जलमार्ग (फेरी और कार्गो सेवा) को एक प्रमुख विकल्प के रूप में अपनाया है, ताकि आम जनता और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित न हो।

सेतु पर बढ़ता दबाव और जाम की समस्या

मई 2026 में पुल के पिलर संख्या 133 के पास स्लैब के क्षतिग्रस्त होने के बाद से ही सेतु पर यातायात का भारी दबाव है। हालांकि प्रशासन ने बेली ब्रिज के निर्माण और मरम्मत कार्य के जरिए यातायात बहाल रखने की कोशिश की है, लेकिन आए दिन वाहनों का बढ़ता दबाव जाम का कारण बन रहा है। हाल ही में सेतु पर 10-10 घंटे तक के जाम देखे गए हैं, जिससे एंबुलेंस, स्कूली बसें और दैनिक यात्री बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। स्थानीय लोग अब इस बात की मांग कर रहे हैं कि पुल पर निर्भरता कम करने के लिए जलमार्ग के विकल्प को और अधिक सुदृढ़ किया जाए।

फेरी और कार्गो सेवा: प्रशासन का 'लाइफलाइन' प्लान

जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बरारी घाट और महादेवपुर घाट के बीच फेरी सेवा को पूरी तरह से व्यवस्थित और सुरक्षित बनाया जाए।

निःशुल्क सेवा: यात्रियों और दोपहिया वाहनों के लिए नाव सेवा को पूरी तरह निःशुल्क कर दिया गया है। सरकार ने नाव संचालकों को भुगतान करने की जिम्मेदारी स्वयं ली है ताकि यात्रियों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

कार्गो की प्राथमिकता: केवल यात्री ही नहीं, बल्कि दूध, सब्जी, दवाओं और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिए कार्गो वेसल्स (Cargo Vessels) को विशेष अनुमति दी गई है। इसके लिए भाड़ा भी निर्धारित कर दिया गया है ताकि कालाबाजारी न हो।

सुरक्षा मानक: प्रशासन ने फेरी संचालन के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बिना लाइफ जैकेट और सुरक्षा उपकरणों के किसी भी नाव का संचालन प्रतिबंधित है। जलमार्ग पर निगरानी के लिए एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को तैनात किया गया है।

जाम से मुक्ति के लिए अन्य उपाय

फेरी सेवा के अलावा, पुल पर यातायात को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने कई अन्य कदम भी उठाए हैं:

बाइकर्स के लिए अलग लेन: पुल पर बाइक चालकों के लिए डेढ़ मीटर की अलग लेन बनाने का कार्य प्रस्तावित है, ताकि वाहनों की लंबी कतारों के बीच बाइकर्स न फंसें।

रंबल स्ट्रिप्स और ब्रेकर हटाना: पुल के ऊपर वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स को हटाने का निर्देश दिया गया है, ताकि वाहनों की रफ्तार कम न हो।

क्विक रिस्पांस टीम (QRT): किसी भी आपात स्थिति या ब्रेकडाउन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए पुलिस की क्यूआरटी टीम को पुल के दोनों ओर तैनात किया गया है।

भविष्य की राह और स्थायी समाधान

प्रशासन का लक्ष्य है कि जब तक विक्रमशिला सेतु का मरम्मत कार्य पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाता (जिसका लक्ष्य नवंबर 2026 तक ट्रस ब्रिज के निर्माण का है), तब तक जलमार्ग और बेहतर यातायात प्रबंधन के जरिए आम लोगों को राहत दी जाए। हालांकि, स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का मानना है कि सेतु की संरचनात्मक मजबूती के लिए केवल मरम्मत काफी नहीं है, बल्कि नियमित स्कैनिंग और दीर्घकालिक देखरेख की आवश्यकता है।

फिलहाल, गंगा की लहरों पर चल रही यह फेरी सेवा भागलपुर और नवगछिया के लाखों लोगों के लिए न केवल एक वैकल्पिक मार्ग है, बल्कि भरोसे का एक प्रतीक भी बन गई है। प्रशासनिक सूझबूझ और जलमार्ग का सही उपयोग ही फिलहाल इस 'ट्रैफिक संकट' से निकलने का एकमात्र सुरक्षित मार्ग दिख रहा है।