10 घंटों तक अंधेरे में डूबा रहा इलाका, जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त

बिहपुर (भागलपुर/नवगछिया): नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत बिहपुर प्रखंड में रविवार की रात हुई हल्की बारिश और हवा के कारण विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। रविवार रात से शुरू हुआ बिजली गुल होने का सिलसिला सोमवार सुबह तक जारी रहा, जिसके कारण उपभोक्ता लगभग 10 घंटों तक भीषण उमस और अंधेरे में रहने को मजबूर हुए। इस लंबी अवधि तक बिजली बाधित रहने के कारण न केवल आम जनजीवन प्रभावित हुआ, बल्कि स्थानीय छोटे व्यवसायों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा है।

रात का 'अंधेरा' और उमस का कहर

रविवार की रात करीब 10 बजे के आसपास हल्की बारिश के साथ चली हवा ने बिहपुर के पावर ग्रिड और फीडर व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। बिजली कटी तो लोग उम्मीद कर रहे थे कि जल्द ही आपूर्ति बहाल हो जाएगी, लेकिन यह उम्मीद सोमवार सुबह तक पूरी नहीं हुई। रातभर बिजली नहीं रहने के कारण लोगों की नींद हराम हो गई। भीषण गर्मी और उमस ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया। बुजुर्गों और बच्चों के लिए रात काटना किसी सजा से कम नहीं था।

प्रभावित क्षेत्र और समस्याएं

बिजली बाधित रहने के कारण उपभोक्ताओं को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा, इसका विवरण कुछ इस प्रकार है:

पेयजल की किल्लत: बिहपुर के ज्यादातर घरों में लोग समरसेबल पंप पर निर्भर हैं। बिजली न रहने के कारण पानी की टंकियां खाली हो गईं, जिससे सुबह के समय दिनचर्या के कार्यों के लिए लोगों को पानी की भारी किल्लत झेलनी पड़ी।

घरेलू कामकाज पर असर: सुबह के नाश्ते और भोजन बनाने में गृहिणियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बिजली के अभाव में अधिकांश घरेलू उपकरण ठप पड़े रहे।

छोटे व्यवसाय और दुकानदारी: सोमवार का दिन साप्ताहिक कार्य दिवस होने के कारण सुबह से ही गहमागहमी रहती है। बिजली नहीं होने के कारण फोटोकॉपी, सैलून, कंप्यूटर सेंटर और छोटे वर्कशॉप चलाने वाले दुकानदारों का काम पूरी तरह से ठप रहा, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

इन्वर्टर भी जवाब दे गए: लंबी अवधि (10 घंटे) तक बिजली न रहने के कारण अधिकांश घरों के इन्वर्टर भी डिस्चार्ज हो गए, जिससे रात के दूसरे पहर में मोबाइल चार्जिंग और आपातकालीन रोशनी की भी समस्या उत्पन्न हो गई।

विद्युत विभाग की सफाई और सोमवार का एक्शन

सोमवार की सुबह जब उपभोक्ता आक्रोशित होकर स्थानीय विद्युत सब-स्टेशन पहुंचे, तो विभाग की ओर से बताया गया कि तेज हवा के कारण कई जगहों पर पेड़ों की डालियां 11 हजार वोल्ट की तारों पर गिर गई थीं। इसके साथ ही कहीं-कहीं इंसुलेटर खराब होने की भी सूचना मिली। विद्युत विभाग के कनीय अभियंता (JE) ने बताया कि सोमवार सुबह से ही विभिन्न टीमों को मरम्मत कार्य में लगाया गया। हालांकि, तारों के जाल और मौसम की स्थिति को देखते हुए मरम्मत कार्य में समय अधिक लगा।

स्थानीय लोगों का आक्रोश

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और व्यापार मंडल के सदस्यों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है:

न्यूनतम रखरखाव का अभाव: हल्की बारिश में ही बिजली गुल हो जाना विभाग की लचर मेंटेनेंस नीति को दर्शाता है। विभाग को मानसून पूर्व पेड़ों की छंटाई और तारों की जांच करनी चाहिए थी, जो कि नहीं की गई।

सूचना का अभाव: बिजली कब तक आएगी, इसकी कोई सटीक जानकारी विभाग की ओर से नहीं दी गई। हेल्पडेस्क पर फोन करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है।

प्रशासन और भविष्य की तैयारी

बिहपुर में आए दिन हो रही बिजली कटौती ने लोगों के मन में अब यह डर पैदा कर दिया है कि आगे बरसात के मौसम में क्या होगा? ग्रामीणों ने मांग की है कि बिजली विभाग बिहपुर सब-स्टेशन में मैनपावर बढ़ाए और तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग करे।

 बिहपुर में 10 घंटों तक बिजली का गायब रहना एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद विभाग दावा करता है कि बिजली आपूर्ति बेहतर होगी, लेकिन धरातल पर स्थिति अभी भी पुरानी ढर्रे पर ही चल रही है। बिजली विभाग को अब इस घटना से सबक लेकर अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होगा, ताकि मौसम की मामूली मार से जनजीवन प्रभावित न हो।

फिलहाल, सोमवार दोपहर तक बिजली आपूर्ति आंशिक रूप से बहाल हो पाई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह घटना विभाग की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ गई है।