नवगछिया के दियारा और मैदानी इलाकों में बढ़ी चिंता, प्रशासन की पैनी नजर
नवगछिया/भागलपुर: बिहार के गंगा और कोसी तटीय क्षेत्रों में जुलाई 2026 के आगमन के साथ ही बाढ़ का खतरा फिर से गहरा गया है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश और कोसी बराज से छोड़े जा रहे पानी के कारण नवगछिया और भागलपुर के मैदानी और दियारा (नदी के बीच स्थित) हिस्सों में जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नदी के बढ़ते जलप्रवाह ने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है, और प्रशासन ने भी अलर्ट जारी कर दिया है।
जलस्तर का बढ़ता दबाव: ताजा स्थिति
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, गंगा और कोसी दोनों नदियां उफान पर हैं। पिछले 48 घंटों में कोसी नदी के मदरौनी गेज स्थल और इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध के पास जलस्तर में लगातार वृद्धि देखी गई है। हालांकि विभाग का दावा है कि अभी सभी तटबंध सुरक्षित हैं और जलस्तर खतरे के निशान (Danger Level) से नीचे है, लेकिन चोरहर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पानी का स्तर तटबंध के बेहद करीब पहुंच चुका है, जो चिंता का मुख्य कारण बना हुआ है।
दियारा क्षेत्र की चुनौतियां
नवगछिया का दियारा क्षेत्र, जो अपनी भौगोलिक बनावट के कारण बाढ़ के प्रति अति-संवेदनशील है, वहां स्थिति गंभीर होती जा रही है:
खेतों में पानी: निचले इलाकों और खेतों में पानी फैलने से धान और अन्य खरीफ की फसलें डूबने की कगार पर हैं। किसानों को अपनी साल भर की मेहनत के बर्बाद होने का डर सता रहा है।
पलायन का डर: जलस्तर में वृद्धि के साथ ही नदी का कटाव (Erosion) भी तेज हो गया है। कई स्थानों पर पानी का दबाव तटबंधों पर बन रहा है, जिसके चलते तटवर्ती गांवों के निवासियों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
संसाधनों की कमी: आवागमन के लिए ग्रामीण इलाकों में नाव ही एकमात्र सहारा रह गई है। इसके अलावा, मवेशियों के चारे और शुद्ध पेयजल की समस्या भी सामने आने लगी है।
प्रशासन की तैयारी और बचाव कार्य
जिला प्रशासन किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिख रहा है। बाढ़ पूर्व तैयारियों के तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
निरंतर निगरानी: संवेदनशील स्परों (Spurs) और तटबंधों पर इंजीनियरों की टीम को 24x7 तैनात किया गया है। हर एक सेंटीमीटर की वृद्धि पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
कटाव निरोधी कार्य: कटाव को रोकने के लिए युद्धस्तर पर बालू की बोरियों (Sandbags) का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि तटबंधों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।
हाई अलर्ट: निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को आगाह किया गया है कि वे नदी तट के करीब न जाएं। प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति के लिए नावों के परिचालन और राहत शिविरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
चुनौती: गंगा और कोसी का संगम
नवगछिया का इलाका इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यहां कोसी और गंगा नदियों का संगम होता है। जब दोनों नदियों का जलस्तर एक साथ बढ़ता है, तो पानी की निकासी धीमी हो जाती है, जिससे जलभराव की स्थिति विकराल रूप धारण कर लेती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की इस अवधि में जलस्तर का गिरना या बढ़ना पूरी तरह से नेपाल की बारिश और बराज से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर करेगा।
नवगछिया और भागलपुर के दियारा इलाकों के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन नदियों का बढ़ता मिजाज बाढ़ जैसी आपदा की ओर संकेत कर रहा है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन और जन-सहयोग दोनों की आवश्यकता है।