ओपीडी काउंटर पर गिरा एसी, व्यवस्था पर उठे सवाल

भागलपुर: जेएलएनएमसीएच (मायागंज अस्पताल) में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अस्पताल के ओपीडी (OPD) रजिस्ट्रेशन काउंटर के ठीक ऊपर लगा एक विशाल एसी अचानक टूटकर नीचे गिर पड़ा। गनीमत यह रही कि उस समय वहां मरीजों की कतार तो थी, लेकिन एसी ठीक उस जगह नहीं गिरा जहां भीड़ थी। यदि यह किसी के ऊपर गिरता, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

घटना का विवरण

मंगलवार सुबह का समय था, जब ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। लोग पर्ची कटवाने के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक एक जोरदार आवाज के साथ काउंटर के ऊपर लगा एसी अपनी जगह से उखड़कर नीचे आ गिरा। एसी गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि वहां मौजूद मरीज और उनके परिजन घबराकर इधर-उधर भागने लगे। कुछ देर के लिए काउंटर पर कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।

क्या रही एसी गिरने की वजह?

घटना के बाद अस्पताल के प्रबंधक सुनील गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस मामले में दो प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं:

तेज हवा और मौसम: प्रबंधक सुनील गुप्ता का कहना है कि बीते कुछ दिनों से इलाके में चल रही तेज हवाओं और आंधी के कारण एसी के माउंटिंग (फिटिंग) पर दबाव पड़ा होगा, जिससे यह घटना हुई।

फिटिंग की कमजोरी और रखरखाव का अभाव: वहीं, प्रत्यक्षदर्शियों और तकनीकी जानकारों का मानना है कि केवल मौसम को दोष देना सही नहीं है। अस्पताल के कई हिस्सों में एसी और अन्य उपकरण पुराने हो चुके हैं। यदि फिटिंग मजबूत होती और समय-समय पर इनका मेंटेनेंस (रखरखाव) किया जाता, तो ऐसी नौबत नहीं आती। जानकारों के अनुसार, एसी के ब्रैकेट में जंग लगना या बोल्ट का ढीला होना इसका मुख्य कारण हो सकता है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था।

अस्पताल की 'जर्जर' होती व्यवस्था

मायागंज अस्पताल, जो पूरे भागलपुर समेत आसपास के कई जिलों के मरीजों का मुख्य केंद्र है, अक्सर अपनी बदहाली के लिए सुर्खियों में रहता है। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है। मरीजों का कहना है कि:

सुरक्षा मानकों की अनदेखी: अस्पताल में लगे उपकरणों की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। यदि एक बड़ा एसी गिरने के बाद भी प्रशासन नहीं चेता, तो भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

समय पर मेंटेनेंस का अभाव: अस्पताल के ज्यादातर एयर कंडीशनर सालों पुराने हैं। इनकी सर्विसिंग न तो नियमित होती है और न ही फिटिंग की मजबूती की जांच की जाती है।

मरीजों की जान से खिलवाड़: ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर जैसे संवेदनशील जगह पर, जहां हमेशा सैकड़ों लोगों की भीड़ रहती है, वहां बिना जांच के भारी उपकरणों का लगा होना सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश

घटना के बाद अस्पताल अधीक्षक और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि ओपीडी के सभी एसी और अन्य लटके हुए उपकरणों की तत्काल तकनीकी जांच करवाई जाएगी। जो उपकरण जर्जर स्थिति में पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत हटाया जाएगा या उनकी फिटिंग को नए सिरे से मजबूत किया जाएगा। फिलहाल, उस काउंटर के पास की जगह को खाली करवा दिया गया है और मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है।

भले ही इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यह सवाल अभी भी खड़ा है कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करेगा? मायागंज अस्पताल में अक्सर सफाई, दवाओं की कमी और मरीजों की समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की सुरक्षा—जैसे बिजली के तारों का जंजाल या भारी मशीनों की फिटिंग—हमेशा उपेक्षित रहती है।

 मायागंज अस्पताल में एसी गिरने की यह घटना एक 'चेतावनी' है। अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि वह केवल फाइलों में मरम्मत न दिखाए, बल्कि धरातल पर उन सभी संभावित खतरों की पहचान करे जो मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। आम जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित और सुव्यवस्थित अस्पताल का वातावरण चाहती है।