अकबरनगर में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से ध्वस्त हुई सफाई व्यवस्था; तीन माह से अधिक के बकाया वेतन की मांग पर अड़े कर्मचारी, कचरे के ढेर में तब्दील हुआ पूरा नगर पंचायत क्षेत्र
भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक और व्यस्त क्षेत्र अकबरनगर नगर पंचायत में इन दिनों बदइंतोमी और गंदगी का आलम अपने चरम पर है। पिछले तीन महीने से अधिक समय (लगभग तीन माह सात दिन) से अपने बकाए वेतन का भुगतान न किए जाने से आक्रोशित सफाईकर्मियों की हड़ताल अब नौवें दिन में प्रवेश कर चुकी है। अपनी जायज मांगों को लेकर सफाईकर्मी पूरी तरह से अपने निर्णय पर अडिग हैं और उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी मेहनत की कमाई उनके बैंक खातों में नहीं आ जाती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। इस लंबी हड़ताल के कारण पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, जिससे स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और इस मार्ग से गुजरने वाले आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।
क्यों भड़की आग? क्या है पूरा मामला?
किसी भी स्थानीय निकाय की रीढ़ वहां के सफाईकर्मी होते हैं, जो शहर को स्वच्छ रखने का काम करते हैं, लेकिन जब उन्हीं का आर्थिक शोषण होने लगे तो व्यवस्था का चरमराना स्वाभाविक है:
तीन महीने से अधिक का वेतन बकाया: सफाईकर्मियों का आरोप है कि पिछले तीन महीने से अधिक समय से उन्हें विभाग की ओर से एक भी रुपया मानदेय या वेतन के रूप में नहीं मिला है। पर्व-त्यौहार और इस महंगाई के दौर में बिना वेतन के अपने परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए असंभव हो गया है।
भुगतान को लेकर प्रशासन का आश्वासन और कर्मियों का अड़ियल रुख: नगर पंचायत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ सफाईकर्मियों की कई दौर की वार्ता हो चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बकाया राशि का भुगतान आगामी 15 अगस्त तक करने का आश्वासन दिया है। वहीं, दूसरी ओर ठगा महसूस कर रहे सफाईकर्मियों का कहना है कि वे अब केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगे। वे इस बात पर पूरी तरह अड़े हैं कि जब तक बकाया राशि उनके बैंक खातों में क्रेडिट (Credit) नहीं हो जाती, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।
कचरे के ढेर में तब्दील हुआ अकबरनगर, सड़ने लगा मलबा
लगातार नौ दिनों से साफ-सफाई का काम पूरी तरह ठप रहने के कारण पूरे नगर पंचायत क्षेत्र की सूरत बिगड़ चुकी है:
बाजारों और गलियों में अंबार: अकबरनगर के मुख्य बाजार, चौक-चौराहों, मुख्य सड़कों और गली-मोहल्लों में कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ खड़े हो गए हैं। घरों से निकलने वाला कचरा सड़कों पर ही बिखर रहा है, जिससे पूरा इलाका बदरंग हो गया है।
कीड़े पड़ने लगे और फैली भयंकर दुर्गंध: स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई जगहों पर खुले में पड़े कचरे के ढेरों में कीड़े तक पड़ने लगे हैं। उठ रही भीषण दुर्गंध के कारण लोगों का अपने घरों से बाहर निकलना या दुकानों पर बैठना तक दूभर हो गया है।
कार्यालय के गेट पर भी कचरा और सीढ़ी का सहारा: विरोध प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित कर्मियों ने नगर पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही कचरा डाल दिया था। मुख्य गेट बंद होने और वहां गंदगी फैलने के कारण अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता को बांस की सीढ़ी के सहारे प्रथम तल स्थित कार्यालय में आना-जाना पड़ रहा है, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बीमारियों का मंडराता खतरा और स्थानीय लोगों की पीड़ा
सफाई व्यवस्था के पूरी तरह से पटरी से उतर जाने के कारण आम जनता में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है:
संक्रामक बीमारियों की आशंका: सड़कों पर सड़ रहे कचरे और उससे पनपने वाले मच्छरों व मक्खियों के कारण क्षेत्र में डायरिया, टायफाइड, उल्टी-दस्त और मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
श्रावणी मेला और राहगीरों की मुसीबत: सावन का महीना चल रहा है और इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में कांवरिया व श्रद्धालु गुजरते हैं। ऐसे में गंदगी और बदबू के बीच लोगों का चलना और रहना दूभर हो गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
नगर पंचायत के कार्यपालक अधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की बात कह रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। सफाईकर्मी अपने हक और बकाया वेतन के भुगतान की मांग पर अडिग हैं। जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और नगर पंचायत बोर्ड तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए वित्तीय प्रक्रियाओं को त्वरित गति से पूरा करें और सफाईकर्मियों के खातों में वेतन की राशि भेजकर इस हड़ताल को समाप्त करवाएं, ताकि अकबरनगर की जनता को इस नरकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।