भागलपुर में नगर निकाय कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आठवें दिन भी जारी; धरना स्थल पर डटे रहे कर्मी, सरकार के खिलाफ नारेबाजी, 

भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के रेशम नगरी भागलपुर में नगर निगम के सफाई कर्मियों, चालकों और कार्यालय कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल गुरुवार को अपने आठवें दिन में प्रवेश कर गई। हड़ताल के लगातार आठ दिनों से जारी रहने के कारण शहर की साफ-सफाई, कूड़ा उठाव और जलापूर्ति से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। जिला नगर निगम संघ के बैनर तले शहर भर के हजारों कर्मी प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए धरना स्थल पर डटे रहे। कर्मचारियों के अड़ियल रुख और सरकार की ओर से ठोस पहल न होने के कारण आने वाले दिनों में संकट के और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

धरना स्थल पर उमड़ी भीड़: गूंजे इंकलाब और हक के नारे

गुरुवार को सुबह से ही भागलपुर नगर निगम परिसर और मुख्य धरना स्थल पर कर्मचारियों का जुटना शुरू हो गया था। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए निगम कर्मियों ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की:

कर्मचारियों का आक्रोश: धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे अपने जायज अधिकारों और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतरने को विवश हुए हैं। जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक यह आंदोलन पीछे हटने वाला नहीं है।

शहर की बदहाल स्थिति पर चिंता: हालांकि हड़ताल के कारण शहर की जनता नारकीय जीवन जीने को मजबूर है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि वे भी मजबूर हैं क्योंकि प्रशासन उनकी रोजी-रोटी और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से टालमटोल की नीति अपना रहा है।

संघ के अध्यक्ष विकास का कड़ा रुख: "जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, जारी रहेगा संघर्ष"

जिला नगर निगम संघ के अध्यक्ष विकास ने आठवें दिन धरने का नेतृत्व करते हुए सरकार और नगर निगम प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कर्मचारियों का यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर आ चुका है:

संघ के अध्यक्ष विकास के मुख्य बिंदु:

लंबित मानदेय और वेतन भुगतान: अध्यक्ष विकास ने कहा कि अनुबंध और दैनिक वेतनभोगियों का महीनों से बकाया वेतन भुगतान अब तक नहीं किया गया है, जिससे उनके परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।

स्थाईकरण की मांग: वर्षों से सेवा दे रहे दैनिक कर्मियों को सेवा-शर्तों के अनुसार स्थाई (Regularize) किया जाए और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।

समान काम, समान वेतन: संविदा पर कार्यरत कर्मियों को भी उनके काम के अनुरूप उचित मानदेय देने की मांग पर संघ पूरी तरह अड़ा हुआ है।

अध्यक्ष विकास की दो टूक चेतावनी: अध्यक्ष विकास ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "हम आठ दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में धरना दे रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है। यदि सरकार ने जल्दबाजी में हमारी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन की होगी।"

शहर में स्वच्छता और जनजीवन पर मंडराता गंभीर संकट

नगर निकाय कर्मचारियों की इस लंबी हड़ताल का सबसे बुरा असर भागलपुर के आम नागरिकों पर पड़ रहा है:

कचरे के ढेर और संक्रामक बीमारियां: शहर के खलीफाबाग, कोतवाली चौक, सूतापट्टी, मनाली चौक, और कचहरी चौक समेत विभिन्न मोहल्लों में पिछले आठ दिनों से कूड़े का उठान नहीं हुआ है। गलियों और सड़कों के किनारे कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ बन चुके हैं, जिनसे उठने वाली सड़न और दुर्गंध के कारण लोगों का घर से निकलना मुहाल हो गया है।

मच्छरों और बीमारियों का प्रकोप: जलजमाव और कचरे के अंबार के कारण मलेरिया, डेंगू, डायरिया और टाइफाइड जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा चरम पर पहुंच गया है। स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने प्रशासन से अपील की है कि वह अहंकार त्यागकर तुरंत कर्मचारियों से वार्ता करे और इस गतिरोध को समाप्त करे।

भागलपुर में नगर निकाय कर्मचारियों की हड़ताल का आठवें दिन भी जारी रहना और संघ के अध्यक्ष विकास द्वारा आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी यह साफ दर्शाती है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे कब तक इन हड़ताली कर्मचारियों की सुध लेते हैं और भागलपुर की जनता को इस नरकीय स्थिति से मुक्ति दिलाते हैं।