गंगा नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण बरारी वाटर वर्क्स में तैनात किए गए अस्थायी मोटर पंपों को सुरक्षित ऊपर लाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी;
भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर शहर को प्रतिदिन लाखों गैलन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने वाले ऐतिहासिक बरारी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) परिसर में इन दिनों गंगा नदी के बदलते तेवर के बीच विशेष प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। हाल के दिनों में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि (उतार-चढ़ाव) को देखते हुए वाटर वर्क्स प्रबंधन ने अत्यधिक सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में नदी के बीच और निचले घाटों पर जलापूर्ति के लिए पूर्व में लगाए गए अस्थायी मोटर पंपों (Temporary Motor Pumps) को जलमग्न होने से बचाने और उनकी तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सुरक्षित रूप से ऊपर (ऊंचे स्थानों पर) शिफ्ट करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
क्यों पड़ी अस्थायी पंपों को ऊपर लाने की जरूरत? जलस्तर में उतार-चढ़ाव का प्रभाव
बरारी वाटर वर्क्स से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों और अभियंत्रण विभाग के अनुसार, गर्मी और मानदसूनी बादलों की आवाजाही के बीच गंगा नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है:
पंपों के डूबने का खतरा: नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर के कारण कच्चे घाटों पर स्थापित किए गए इन अस्थायी पंपों और उनके विद्युत संयोजन (Electrical Wiring & Panels) के पानी में डूब जाने का गंभीर जोखिम उत्पन्न हो गया था। यदि समय रहते इन भारी-भरकम पंपों को ऊपर नहीं लाया जाता, तो पानी के भीतर शॉर्ट सर्किट होने या बहुमूल्य मोटर के जलने की पूरी आशंका बनी हुई थी।
पेयजल आपूर्ति में व्यवधान की आशंका: भागलपुर के अधिकांश शहरी इलाकों (जैसे खलीफाबाग, कोतवाली, सूतापट्टी, तिलकामांझी, आदमपुर और नाथनगर आदि) में जलापूर्ति का मुख्य आधार यही बरारी वाटर वर्क्स है। यदि पंप खराब हो जाते, तो शहर के लाखों लोगों के घरों में नल से मिलने वाले पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती थी। इसी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रबंधन ने यह अग्रिम कदम उठाया है।
डब्ल्यूटीपी प्रबंधन की मुस्तैदी: कर्मियों द्वारा युद्धस्तर पर अभियान
बरारी डब्ल्यूटीपी (WTP) के वरिष्ठ प्रबंधन और स्थानीय अभियंताओं की देखरेख में कुशल तकनीकी कर्मियों और मजदूरों की टीम सुबह से ही राहत और बचाव कार्य की तर्ज पर जुटी हुई है:
क्रेन और रस्सियों की मदद से सुरक्षित निकासी: कर्मियों द्वारा विशेष क्रेन, पुल्लियों और मजबूत रस्सियों की सहायता से नदी के तेज बहाव और फिसलन भरे किनारों के बीच से इन भारी-भरकम अस्थायी मोटरों और सक्शन पाइपों को सावधानीपूर्वक ऊपर खींचा जा रहा है।
वैकल्पिक व्यवस्था और सुचारू जलापूर्ति: प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि पंपों को ऊपर लाने और उनकी री-पोजीशनिंग (पुनःस्थापना) के दौरान शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े, इसके लिए तकनीकी रूप से वैकल्पिक और समानांतर मोटरों को चालू रखा गया है। कर्मियों की यह टीम चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है ताकि किसी भी उपभोक्ता को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।
प्रबंधन का बयान: "जनहित और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता"
बरारी वाटर वर्क्स के प्रबंधकीय अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि गंगा नदी के जलस्तर पर केंद्रीय जल आयोग (CWC) और स्थानीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के माध्यम से लगातार नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों ने कहा, “बरारी जल शोधन संयंत्र से शहर के लाखों नागरिकों को पेयजल मिलता है। मौसम के मिजाज और नदी के बढ़ते जलस्तर को भांपते हुए हमने बिना एक पल गंवाए अपने तकनीकी अमले को मुस्तैद कर दिया है। अस्थायी पंपों को सुरक्षित ऊपर लाने का यह कार्य पूरी तरह एहतियाती और तकनीकी रूप से आवश्यक था, ताकि आपातकालीन स्थिति में भी जलापूर्ति एक मिनट के लिए भी बाधित न हो।”
भागलपुर के बरारी वाटर वर्क्स में गंगा के बढ़ते जलस्तर के मद्देनजर अस्थायी मोटर पंपों को सुरक्षित ऊपर लाने की यह त्वरित कार्रवाई जलशोधन संयंत्र प्रबंधन की पेशेवर सतर्कता और प्रशासनिक मुस्तैदी का एक बेहतरीन उदाहरण है। कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत और तकनीकी सूझबूझ के चलते न केवल सरकारी संपत्तियों (मोटर व उपकरणों) की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि भागलपुर की आम जनता को बिना किसी बाधा के शुद्ध पेयजल की निरंतर आपूर्ति भी मिल रही है।