यूनिवर्सिटी एक्ट में होगा क्रांतिकारी बदलाव: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सय्यद अता हसनैन की बैठक में बनी 'सुपर पॉलिसी'!
बिहार के लाखों छात्र-छात्राओं और उच्च शिक्षा के भविष्य के लिए नीतीश कुमार के बाद कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और कुलाधिपति-सह-राज्यपाल सय्यद अता हसनैन की जोड़ी ने एक बेहद ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला लिया है। अब बिहार में उच्च शिक्षा का स्तर सुधारने और इसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए एक नया यूनिवर्सिटी कानून (New University Act) लाया जा रहा है।
पटना के लोक भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय मैराथन बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और महामहिम राज्यपाल सय्यद अता हसनैन ने आपसी सहमति से इस नए कानून के मसौदे पर मुहर लगाई। इस नए कानून की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह होगी कि इसमें देश के अन्य विकसित राज्यों के सर्वश्रेष्ठ राज्य विश्वविद्यालयों और देश की प्रतिष्ठित सेंट्रल यूनिवर्सिटीज (जैसे DU, JNU और BHU) की टॉप-क्लास प्रशासनिक प्रणालियों (Best Practices) को एकीकृत किया जाएगा।
'मिशन मोड' में डिग्री: 30 सितंबर तक खत्म होगा पेंडिंग डिग्रियों का कलंक
बिहार के विश्वविद्यालयों की सबसे बड़ी बदनामी समय पर परीक्षा न होने और सालों-साल डिग्री लटकी रहने के कारण होती रही है। इस बैठक में इस समस्या का परमानेंट इलाज ढूंढ लिया गया है:
30 सितंबर की डेडलाइन: मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने सख्त लहजे में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में जितनी भी डिग्रियां पेंडिंग हैं, उन्हें 30 सितंबर तक हर हाल में वितरित करने के लिए 'मिशन मोड' में काम चलाया जाएगा।
31 दिसंबर तक 'समर्थ पोर्टल': राज्यपाल सय्यद अता हसनैन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि यूनिवर्सिटी 'समर्थ पोर्टल' (University Samarth Portal) के सभी 26 मॉड्यूल को 31 दिसंबर तक पूरी तरह लागू कर दिया जाए। इसके बाद दाखिले से लेकर परीक्षा फॉर्म और रिजल्ट तक की सारी प्रक्रिया 100% डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी।
211 नए डिग्री कॉलेजों में संविदा पर बहाल होंगे असिस्टेंट प्रोफेसर
बिहार सरकार राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक उच्च शिक्षा का जाल बिछाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी के तहत राज्य में 211 नए डिग्री कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इन कॉलेजों को सुचारू रूप से चलाने के लिए शिक्षकों की कमी को तुरंत दूर किया जाएगा:
केंद्रीकृत भर्ती प्रक्रिया: इन 211 नव-स्थापित कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों (Assistant Professors) की कमी को पूरा करने के लिए संविदा (Contractual Basis) पर शिक्षकों की बंपर बहाली होगी।
पारदर्शिता का ख्याल: भर्ती के लिए एक सेंट्रलाइज्ड प्रोसेस (केंद्रीकृत व्यवस्था) अपनाई जाएगी ताकि बिना किसी पैरवी या धांधली के योग्य और प्रतिभावान युवाओं को कॉलेज में पढ़ाने का मौका मिल सके।
एक नज़र में: बिहार यूनिवर्सिटी का नया कानून (2026)
| नीतिगत बदलाव का क्षेत्र | नया नियम / तय समय सीमा | होने वाला बड़ा असर |
|---|---|---|
| प्रशासनिक ढांचा | केंद्रीय और अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों का मॉडल। | सत्र (Session) नियमित होंगे, पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ेगी। |
| लंबित डिग्रियां | 30 सितंबर तक शत-प्रतिशत वितरण। | छात्रों को नौकरी और उच्च शिक्षा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। |
| समर्थ पोर्टल | 31 दिसंबर तक सभी 26 मॉड्यूल लाइव। | दाखिला, फीस, परीक्षा और रिजल्ट पूरी तरह ऑनलाइन। |
| नए डिग्री कॉलेज | 211 कॉलेजों में संविदा पर असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली। | ग्रामीण क्षेत्रों में तुरंत शुरू होगी उच्च स्तरीय पढ़ाई। |
| तबादला नीति | केवल जून महीने में रूटीन ट्रांसफर, बाकी वक्त कुलाधिपति की अनुमति अनिवार्य। | कॉलेजों में प्रशासनिक अनुशासन और स्थिरता आएगी। |
'जून' का फॉर्मूला: अब साल भर नहीं चलेंगे तबादलों के खेल
अक्सर विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर लॉबिंग और राजनीति चलती रहती थी, जिससे पढ़ाई का माहौल खराब होता था। नए कानून के तहत इसके लिए भी कड़े नियम बना दिए गए हैं:
रूटीन ट्रांसफर सिर्फ जून में: शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के नियमित या रूटीन तबादले केवल जून के महीने में ही किए जा सकेंगे, ताकि शैक्षणिक सत्र के बीच में पढ़ाई बाधित न हो।
असाधारण मामलों में ही छूट: जून के अलावा साल के किसी भी अन्य महीने में ट्रांसफर तभी संभव होगा जब कोई बेहद गंभीर या असाधारण परिस्थिति हो। इसके लिए भी कुलाधिपति (राज्यपाल) की पूर्व अनुमति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
"प्रतिभा पलायन रोकना हमारा संकल्प" — मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
बैठक के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा:
"बिहार के बच्चों में अदम्य प्रतिभा है, लेकिन हमारे विश्वविद्यालयों के लचर सिस्टम के कारण उन्हें विवश होकर दिल्ली, महाराष्ट्र या दक्षिण भारत के राज्यों का रुख करना पड़ता है। हमारा लक्ष्य एक ऐसा मजबूत और आधुनिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां बिहार के छात्र को अपनी उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर कदम न रखना पड़े। नया कानून बिहार के विश्वविद्यालयों की साख को देश भर में पुनर्स्थापित करेगा।"
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सय्यद अता हसनैन के बीच हुआ यह समन्वय बिहार की उच्च शिक्षा के इतिहास में टर्निंग पॉइंट साबित होने जा रहा है। पेंडिंग डिग्रियों को बांटने की 30 सितंबर की समय सीमा और नए सिरे से 211 कॉलेजों में प्रोफेसरों की भर्ती से युवाओं में एक नई उम्मीद जगी है। यदि इस नए कानून को जमीन पर उसी सख्ती के साथ लागू किया गया जैसा कि खाका तैयार हुआ है, तो बिहार जल्द ही नालंदा और विक्रमशिला के अपने पुराने गौरवमयी दिनों की ओर लौट सकता है।