शेरमारी इंटर लेवल हाई स्कूल में सोशल ऑडिट को लेकर बैठक, 6 जुलाई से शुरू होगी स्कूलों की जांच प्रक्रिया

पीरपैंती (भागलपुर): शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा शुरू किए गए 'सोशल ऑडिट' (सामाजिक अंकेक्षण) को लेकर पीरपैंती प्रखंड के शेरमारी इंटर लेवल हाई स्कूल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक प्रतिनिधि और स्थानीय प्रबुद्धजनों ने भाग लिया। इस सत्र का मुख्य आकर्षण डीआरडीए (DRDA) की सोशल ऑडिटर सतीमा बेगम का संबोधन रहा, जिन्होंने सोशल ऑडिट की बारीकियों और उसके उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

क्या है सोशल ऑडिट और इसका महत्व?

बैठक को संबोधित करते हुए सोशल ऑडिटर सतीमा बेगम ने बताया कि बिहार के सभी सरकारी विद्यालयों में सोशल ऑडिट की प्रक्रिया आगामी 6 जुलाई से विधिवत शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए यह एक अनिवार्य कदम है। सोशल ऑडिट का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े छात्र तक पहुँच रहा है या नहीं। इसमें मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal), विद्यालय की आधारभूत संरचना, शैक्षणिक गुणवत्ता और वित्तीय प्रबंधन की गहन समीक्षा की जाएगी।

विद्यालय स्तर पर होगी पारदर्शी जांच

सतीमा बेगम ने स्पष्ट किया कि सोशल ऑडिट केवल फाइलों की जांच नहीं है, बल्कि यह विद्यालय और समुदाय के बीच के जुड़ाव को मजबूत करने का एक माध्यम है। जांच के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:

मध्याह्न भोजन: भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और छात्रों को मिलने वाले पोषक तत्वों की उपलब्धता।

नामांकन और उपस्थिति: विद्यालय में छात्रों के वास्तविक नामांकन और प्रतिदिन उनकी उपस्थिति की स्थिति।

आधारभूत सुविधाएं: विद्यालय में पेयजल, शौचालय, खेल का मैदान और कक्षा-कक्षों की उपलब्धता और उनका रखरखाव।

वित्तीय पारदर्शिता: विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) को प्राप्त होने वाली राशि का व्यय नियमानुसार किया गया है या नहीं।

प्रधानाध्यापकों को दिए गए निर्देश

बैठक में उपस्थित सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया कि वे सोशल ऑडिट के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज, जैसे कि कैश बुक, स्टॉक रजिस्टर, उपस्थिति पंजी और अन्य सरकारी अभिलेखों को अद्यतन (Update) रखें। सतीमा बेगम ने जोर देकर कहा कि ऑडिट टीम के सहयोग में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद खामियों को दूर करना है ताकि बच्चों को एक बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सके।"

समुदाय की भागीदारी जरूरी

ऑडिटर ने ग्रामीणों और अभिभावकों से अपील की कि वे सोशल ऑडिट के दौरान सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों का फीडबैक सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी विद्यालय में योजनाओं के कार्यान्वयन में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो आम जनता बिना किसी संकोच के ऑडिट टीम के समक्ष अपनी बात रख सकती है।

बैठक में दिखी गंभीरता

शेरमारी इंटर लेवल हाई स्कूल में आयोजित इस बैठक में स्थानीय शिक्षा विभाग के कई अधिकारी और शिक्षक मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में सोशल ऑडिट प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। बैठक के समापन पर यह संदेश दिया गया कि शिक्षा के अधिकार को जमीन पर सही तरीके से उतारने के लिए यह ऑडिट एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

पीरपैंती प्रखंड के अन्य विद्यालयों के लिए भी इस ऑडिट की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। 6 जुलाई से शुरू होने वाली यह प्रक्रिया अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगी, जिससे विद्यालयों की कार्यशैली में गुणात्मक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।