मनीगाछी में प्रशासनिक हलचल: प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी पर आर्थिक दोहन का आरोप, विभागीय जांच के आदेश

दरभंगा: मनीगाछी प्रखंड के प्रशासनिक गलियारे में उस समय हड़कंप मच गया जब प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) शमसुल हसन के विरुद्ध आर्थिक दोहन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया। यह मामला प्रखंड के जन वितरण प्रणाली (PDS) डीलरों और गैस एजेंसी संचालकों से अवैध वसूली से जुड़ा है। राज्य के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश जारी किए हैं।

विवाद की जड़: क्या है मामला?

आरोप है कि मनीगाछी के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी शमसुल हसन पर लंबे समय से स्थानीय स्तर पर तैनात डीलरों और गैस एजेंसी संचालकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने और उनसे 'सुविधा शुल्क' के नाम पर अवैध राशि की मांग करने के आरोप लग रहे थे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की जाती थी, तो उन्हें कागजी कार्रवाई में फंसाने या लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी जाती थी।

पूर्व जदयू (यूथ) प्रदेश अध्यक्ष की शिकायत पर कार्रवाई

इस मामले के तूल पकड़ने के पीछे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, जदयू (युवा) की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने इस संबंध में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के वरीय अधिकारियों को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा था। शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि किस प्रकार सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा डीलरों का आर्थिक दोहन किया जा रहा है।

शिकायत के आधार पर विभाग ने संज्ञान लेते हुए एक उच्च-स्तरीय जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया है। अब यह टीम मनीगाछी पहुँचकर मामले की सच्चाई का पता लगाएगी।

डीलरों और संचालकों का पक्ष

इस मुद्दे पर मनीगाछी के कई डीलरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें हर महीने अनाज के वितरण के बाद हिसाब-किताब के नाम पर चक्कर लगवाए जाते थे। यदि वे निर्धारित कमीशन या अन्य मांगें पूरी नहीं करते, तो उन्हें आवंटन मिलने में देरी की जाती थी।

गैस एजेंसी संचालकों का भी यही दर्द है। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड और सत्यापन के नाम पर उनसे लगातार अवैध वसूली की जा रही थी, जिससे उनका व्यापार करना मुश्किल हो गया था।

जांच का दायरा

विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहेगी:

अवैध वसूली के प्रमाण: क्या वास्तव में डीलर और गैस संचालकों से कोई अनुचित मांग की गई थी?

वित्तीय अनियमितता: क्या प्रखंड कार्यालय में आपूर्ति से संबंधित फाइलों के निपटारे में पैसे का लेन-देन हुआ है?

कार्यशैली: क्या अधिकारी द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर किसी को प्रताड़ित किया गया है?

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की भूमिका

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के प्रति उनकी नीति 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि किसी भी लोक सेवक को अपनी शक्ति का उपयोग निजी लाभ के लिए करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी पर कठोर विभागीय कार्यवाही, निलंबन और यहां तक कि दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

स्थानीय राजनीति और प्रभाव

इस मामले के सामने आने के बाद मनीगाछी की स्थानीय राजनीति भी गर्म हो गई है। विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है, जबकि सत्ताधारी दल के नेता मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिला रहे हैं। इस प्रशासनिक उठापटक के बीच आम जनता को उम्मीद है कि विभाग की यह कार्रवाई सरकारी वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाएगी।

पारदर्शिता की दिशा में कदम

प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के खिलाफ यह जांच न केवल एक अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे PDS सिस्टम की कार्यप्रणाली को सुधारने का एक मौका भी है। यदि जांच सफल होती है, तो यह मनीगाछी के डीलरों के लिए एक बड़ी राहत होगी और भविष्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम करेगी।

फिलहाल, मनीगाछी प्रखंड के प्रशासनिक हलकों में जांच दल के आने का इंतजार है। शिकायतकर्ता और स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में नहीं आएगी। शमसुल हसन के भविष्य का फैसला अब विभाग की जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।