'बैगलेस डे' पर बच्चों ने सीखी हुनर की कला, कागज और कपड़े से बनाए आकर्षक थैले

गोराडीह/जगदीशपुर (भागलपुर): शिक्षा को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर व्यावहारिक कौशल से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को जगदीशपुर प्रखंड के सभी सरकारी विद्यालयों में 'बैगलेस डे' (Bagless Day) का आयोजन किया गया। इस विशेष दिन पर बच्चों के कंधों से भारी बस्ते का बोझ तो उतरा ही, साथ ही उन्होंने 'लर्निंग बाय डूइंग' (करके सीखने) के माध्यम से कागज और कपड़े के थैले बनाना सीखा।

पर्यावरण संरक्षण का मिला संदेश

गोराडीह क्षेत्र के विद्यालयों में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'वेस्ट टू बेस्ट' (कचरे से बेहतरीन वस्तु बनाना) रहा। शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने पुराने अखबारों, बेकार कागजों और घर से लाए गए कपड़ों के टुकड़ों से आकर्षक और मजबूत थैले तैयार किए। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य बच्चों को प्लास्टिक मुक्त समाज के प्रति जागरूक करना था। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार प्लास्टिक पर्यावरण के लिए घातक है और कपड़े या कागज के थैले उसका एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

बच्चों में दिखा गजब का उत्साह

विद्यालयों में शनिवार का दिन पूरी तरह से रचनात्मक गतिविधियों के नाम रहा। जहां एक तरफ बच्चे अपनी सृजनात्मकता का प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उनके चेहरों पर एक अलग ही खुशी थी। कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों ने बड़े चाव से सुई-धागा और गोंद का इस्तेमाल कर अपने-अपने थैले तैयार किए।

एक छात्रा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "आज हमें अपना बस्ता नहीं लाना पड़ा, बल्कि हमने स्कूल में खुद से थैला बनाना सीखा। अब मैं बाजार जाते समय इसी थैले का उपयोग करूंगी।" शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के आयोजन से बच्चों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है।

शिक्षकों ने दी व्यावसायिक प्रशिक्षण की झलक

जगदीशपुर प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने बताया कि राज्य शिक्षा परियोजना के निर्देशानुसार, हर शनिवार को बैगलेस डे मनाया जाता है। इस शनिवार का विषय 'कौशल विकास' था। शिक्षकों ने बच्चों को केवल थैला बनाना ही नहीं सिखाया, बल्कि इसके उपयोग और इसे बनाकर आत्मनिर्भर बनने की बारीकियों पर भी चर्चा की। यह छोटे-छोटे कदम बच्चों को भविष्य में उद्यमिता (Entrepreneurship) की ओर प्रेरित करने में सहायक सिद्ध होंगे।

समाज में जाएगी सकारात्मक संदेश

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों के मानसिक तनाव को कम करना और उनमें सर्वांगीण विकास करना है। जब बच्चे अपने हाथों से कोई वस्तु तैयार करते हैं, तो उनकी सोचने-समझने की क्षमता का विकास होता है। इन थैलों को बनाकर बच्चों ने न केवल अपने कौशल को निखारा, बल्कि अपने अभिभावकों को भी पर्यावरण के अनुकूल सामानों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने का वादा किया।

इस सफल आयोजन के बाद, विद्यालयों के परिसरों में बच्चों द्वारा बनाए गए रंग-बिरंगे थैलों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। स्थानीय लोगों ने भी बच्चों की इस पहल की सराहना की है। अब उम्मीद है कि आने वाले समय में ये छात्र अपने दैनिक जीवन में भी प्लास्टिक को पूरी तरह से त्याग देंगे, जो एक स्वस्थ और स्वच्छ समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।