बिहार के कई जिलों में आज भी बारिश के आसार, गोपालगंज और पश्चिम चंपारण में भारी बारिश का अलर्ट; कमजोर मानसून ने बढ़ाई किसानों की चिंता

पटना। बिहार में मानसून की रफ्तार अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाई है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को राज्य के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से गोपालगंज और पश्चिम चंपारण के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा उत्तर और पूर्वी बिहार के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज के साथ छींटे पड़ने और तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण अगले 24 से 48 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में वर्षा गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

हालांकि, मानसून के बिहार में प्रवेश किए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक अधिकांश जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की असमान स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की रोपनी का समय चल रहा है, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कई जिलों में खेत सूखे पड़े हैं। जिन इलाकों में नहर और सिंचाई की व्यवस्था सीमित है, वहां किसान पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं। ऐसे में मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान किसानों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है।

आईएमडी के अनुसार गोपालगंज और पश्चिम चंपारण में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों के निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति बनने की आशंका है। यदि लगातार कई घंटों तक तेज बारिश होती है तो छोटी नदियों और नालों का जलस्तर भी बढ़ सकता है। जिला प्रशासन को सतर्क रहने और संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम विभाग ने यह भी बताया कि पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, भागलपुर, बांका, जमुई सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ वर्षा हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

राज्य में इस वर्ष मानसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कई जिलों में अब तक सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की सक्रियता बीच-बीच में कमजोर पड़ने के कारण बारिश का वितरण असमान रहा है। कुछ क्षेत्रों में अच्छी वर्षा हुई, जबकि कई जिले अब भी सामान्य बारिश का इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि खेती-किसानी पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।

धान बिहार की प्रमुख खरीफ फसल है और इसकी रोपाई समय पर वर्षा होने पर निर्भर करती है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों को निजी पंपसेट और डीजल इंजन के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक लगातार बारिश होती है तो धान की रोपनी में तेजी आएगी और फसल उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

बारिश से केवल कृषि क्षेत्र ही नहीं, बल्कि जल संसाधनों को भी फायदा होगा। तालाब, पोखर, नहर और जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा, जिससे आने वाले महीनों में सिंचाई की समस्या कम हो सकती है। भूजल स्तर में भी सुधार होने की संभावना है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

मौसम विभाग ने बारिश के साथ वज्रपात और तेज हवाओं की भी चेतावनी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। किसानों को भी खेतों में काम करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मछुआरों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने को कहा गया है।

शहरी क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर जलजमाव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। नगर निकायों को जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। बिजली विभाग को भी सतर्क रहने को कहा गया है, क्योंकि तेज हवा और वज्रपात के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी मानसून के दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बारिश के मौसम में दूषित पानी और जलभराव के कारण डायरिया, वायरल बुखार, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों से साफ पानी पीने, स्वच्छता बनाए रखने और जलजमाव वाले क्षेत्रों से बचने की अपील की गई है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी सभी जिलों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। संभावित बाढ़, जलजमाव और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दलों को तैयार रहने को कहा गया है। जिला प्रशासन लगातार मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वी भारत में सक्रिय हो रहे मौसमी सिस्टम के कारण आने वाले दिनों में बिहार में बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। यदि यह सिस्टम मजबूत बना रहता है तो राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे अब तक की वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। हालांकि, कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश से स्थानीय स्तर पर जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है।

कुल मिलाकर, मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान बिहार के किसानों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है। यदि अगले कुछ दिनों तक लगातार बारिश होती है तो धान की खेती को गति मिलेगी, जल संसाधन बेहतर होंगे और राज्य में मानसून की स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा। वहीं प्रशासन और लोगों को भी भारी बारिश और वज्रपात को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।