डीएम कुमार गौरव ने परखी पूर्व सैनिकों के लंबित मामलों की फाइलें, विंग कमांडर ने रखे 16 बड़े प्रस्ताव, ऑन-स्पॉट कार्रवाई का निर्देश
देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सशस्त्र बलों (Armed Forces) के जवानों और उनके परिवारों के कल्याण को लेकर मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने एक अत्यंत संवेदनशील और कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्ट्रेट के वीआईपी सभागार में रविवार (28 जून 2026) को जिलाधिकारी कुमार गौरव की अध्यक्षता में जिला अनुश्रवण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मुजफ्फरपुर जिले के मूल निवासी वर्तमान सैनिकों, सेवानिवृत्त वीर जवानों (Veterans) और शहीद सैनिकों की विधवाओं (War Widows) के विभिन्न सरकारी विभागों में लंबित पड़े मामलों का त्वरित निष्पादन (Fast-Track Redressal) करना था। बैठक में सैनिक कल्याण बोर्ड के जिला प्रतिनिधि और भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर यूके त्रिपाठी ने जिला प्रशासन के सामने कुल 16 गंभीर और नीतिगत प्रस्ताव पेश किए। इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करते हुए डीएम कुमार गौरव ने विभिन्न अंचलाधिकारियों (CO) और पुलिस अधिकारियों को ऑन-द-स्पॉट समय सीमा (Timeline) तय करते हुए मामलों को निपटाने का अल्टीमेटम दे दिया।
विंग कमांडर यूके त्रिपाठी के 16 प्रस्ताव: क्या हैं सैनिकों की मुख्य समस्याएं?
बैठक की शुरुआत में जिला सैनिक कल्याण पदाधिकारी सह विंग कमांडर यूके त्रिपाठी ने एक-एक कर उन 16 प्रस्तावों को डिजिटल स्क्रीन और फाइलों के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष रखा, जो लंबे समय से लालफीताशाही (Bureaucracy) के कारण दबे हुए थे।
प्रस्तावों की मुख्य श्रेणियां (Categorization of Proposals):
भूमि और संपत्ति विवाद (Land Disputes): 16 में से सर्वाधिक 8 मामले पूर्व सैनिकों की पुश्तैनी जमीनों पर स्थानीय भू-माफियाओं या दबंगों द्वारा अवैध कब्जे और पैतृक संपत्ति के विवाद से जुड़े थे। जवान जब सीमा पर तैनात होते हैं, पीछे से उनकी जमीनों पर कब्जे का प्रयास किया जाता है।
पेंशन और वित्तीय विसंगतियां (Pension Grievances): पूर्व सैनिकों और वीर नारियों (शहीदों की पत्नियों) के पारिवारिक पेंशन, बकाया एरियर और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ मिलने में हो रही प्रशासनिक देरी का मुद्दा उठाया गया।
सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई (Security & Police Support): कुछ सेवानिवृत्त सैनिकों ने अपने स्थानीय गांवों में जान-माल का खतरा होने और स्थानीय थानों द्वारा उनकी प्राथमिकताओं (FIR) को दर्ज करने में टालमटोल करने की गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
अनुकंपा पर नौकरी (Compassionate Appointments): शहीद या सेवा के दौरान दिवंगत हुए सैनिकों के आश्रितों को राज्य सरकार के नियमों के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरियों के लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की मांग की गई।
डीएम कुमार गौरव का सख्त रुख: "जवान सीमा पर सुरक्षित हैं, तो हम यहां सुरक्षित हैं; उनके काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं"
विंग कमांडर द्वारा पेश किए गए एक-एक मामले को ध्यान से सुनने के बाद जिलाधिकारी कुमार गौरव का रुख बेहद कड़ा हो गया। उन्होंने बैठक में मौजूद राजस्व अधिकारियों (Revenue Officers) और पुलिस उपाधीक्षकों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि सैनिकों के मामलों में किसी भी स्तर पर सुस्ती को सीधे तौर पर अनुशासनहीनता माना जाएगा।
जिलाधिकारी का कड़ा आधिकारिक निर्देश: "जो जवान देश की सीमाओं पर शून्य से नीचे के तापमान और कठिन परिस्थितियों में हमारी सुरक्षा के लिए मुस्तैद हैं, उनके परिवारों को अपने हक की जमीन, सुरक्षा और पेंशन के लिए मुजफ्फरपुर के सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ें, यह जिला प्रशासन के लिए डूब मरने वाली बात है। विंग कमांडर त्रिपाठी द्वारा सौंपे गए सभी 16 प्रस्तावों को मैंने स्वयं अपनी सीधी निगरानी (Direct Monitoring) में ले लिया है। सभी संबंधित अंचलाधिकारी (CO) और थाना प्रभारी (SHO) अगले 15 दिनों के भीतर इन मामलों की जांच कर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सीधे मेरे दफ्तर को सौंपेंगे।"
भूमि विवादों के निपटारे के लिए 'विशेष शनिवार कैंप' का खाका
डीएम ने जमीन विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक विशेष कार्य योजना (Action Plan) तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हर शनिवार को अंचल स्तर पर लगने वाले जनता दरबार में पूर्व सैनिकों और वर्तमान सैनिकों के मामलों को 'प्राथमिकता सूची' (Priority List) में सबसे ऊपर रखा जाएगा।
अंचलाधिकारियों को निर्देश: यदि किसी सैनिक की भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है, तो राजस्व अधिकारी बिना किसी देरी के पुलिस बल की मदद से उस कब्जे को हटाएंगे और सैनिक के परिवार को कब्जा वापस दिलाएंगे।
हथियार लाइसेंस की समीक्षा: सेवानिवृत्त सैनिकों द्वारा आत्मरक्षार्थ मांगे गए शस्त्र लाइसेंस (Arms License) के आवेदनों का पुलिस सत्यापन (Police Verification) 7 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया ताकि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षा मिल सके।
डेटा शीट: जिला अनुश्रवण समिति बैठक का मुख्य एजेंडा
| प्रस्तावों की कुल संख्या | मुख्य फोकस क्षेत्र | नोडल एजेंसी / अधिकारी | निष्पादन की समय सीमा |
|---|---|---|---|
| 16 प्रस्ताव | भूमि विवाद, सुरक्षा, पेंशन और अनुकंपा | जिला सैनिक कल्याण बोर्ड और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) | अधिकतम 15 दिन |
| 08 विशेष मामले | भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा | संबंधित अंचल के अंचलाधिकारी (CO) और पुलिस | ऑन-स्पॉट जांच और बेदखली |
'वीर नारियों' और बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए बनेगा 'विशेष हेल्प डेस्क'
बैठक में पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य और बुढ़ापे की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। डीएम कुमार गौरव ने निर्देश दिया कि कलेक्ट्रेट और जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में एक 'विशेष हेल्प डेस्क' (Special Help Desk) की स्थापना की जाए।
इस डेस्क के माध्यम से बुजुर्ग पूर्व सैनिकों और शहीदों की विधवाओं को अपनी समस्याओं के लिए अलग-अलग दफ्तरों की सीढ़ियां नहीं चढ़नी पड़ेंगी।
उनकी फाइलों पर लाल रंग का विशेष 'सैनिक फ्लैग' (Sarkari Tag) लगाया जाएगा, जिससे हर टेबल पर मौजूद क्लर्क को पता होगा कि इस फाइल को बिना किसी देरी के आगे बढ़ाना है
मुजफ्फरपुर जिला अनुश्रवण समिति की यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक सरकारी बैठक नहीं थी, बल्कि यह प्रशासन की हमारे सशस्त्र बलों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का एक जीता-जागता उदाहरण है। विंग कमांडर यूके त्रिपाठी के 16 प्रस्तावों पर डीएम कुमार गौरव का त्वरित एक्शन और 15 दिनों की कड़ी समय सीमा तय करना यह दर्शाता है कि मुजफ्फरपुर प्रशासन अब फाइलों को दबाने के बजाय ऑन-द-स्पॉट रिजल्ट देने में विश्वास रखता है। जिला प्रशासन के इस कड़े और सकारात्मक रुख से जिले के हजारों सैनिक परिवारों में सुरक्षा और सम्मान की एक नई लहर दौड़ गई है। अब देखना यह है कि नीचे के अधिकारी (सीओ और थानेदार) डीएम के इस आदेश का जमीन पर कितनी ईमानदारी से पालन करते हैं।