टेंडर घोटाले में फंसा ठेकेदार रिशुश्री एसवीयू की पूछताछ में असहयोगात्मक; 'सिस्टम' पर किए बड़े खुलासे
राज्य के चर्चित टेंडर घोटाले में गिरफ्तार ठेकेदार रिशुश्री की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की रिमांड के दौरान आरोपी ठेकेदार ने जांच में सहयोग करने के बजाय चुप्पी साध रखी है, जिससे कई बड़े अधिकारियों की संलिप्तता का राज अभी भी दबा हुआ है।
चुप्पी और बचाव: एसवीयू के सूत्रों के अनुसार, रिशुश्री से जब अधिकारियों के साथ उसके संबंधों (Nexus) के बारे में पूछा जाता है, तो वह सीधे जवाब देने से बच रहा है। वह प्रभावशाली अधिकारियों के नाम उजागर नहीं कर रहा है।
भ्रष्टाचार का 'कड़वा सच': रिमांड के दौरान पूछताछ में रिशुश्री ने एक विवादित बयान दिया है। उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि "सरकारी काम बिना लेनदेन (कमीशन) के संभव ही नहीं है।" उसने दावा किया है कि विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार एक सामान्य प्रक्रिया है।
असहयोगात्मक व्यवहार: रिमांड पर रहने के दौरान रिशुश्री का व्यवहार लगातार असहयोगात्मक बना हुआ है। एसवीयू के अधिकारियों का कहना है कि वह सवालों को घुमा-फिरा रहा है और जांच को भटकाने की कोशिश कर रहा है।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| जांच एजेंसी | स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) |
| मुख्य चुनौती | प्रभावशाली अधिकारियों और ठेकेदार के बीच की मिलीभगत के पुख्ता डिजिटल सबूत जुटाना। |
| आरोपी का रवैया | असहयोगात्मक; सिस्टम में भ्रष्टाचार को एक 'नियम' के रूप में पेश कर रहा है। |
| अगला कदम | एसवीयू द्वारा मोबाइल डेटा और वित्तीय ट्रांजेक्शन की फॉरेंसिक जांच। |
रिशुश्री का यह बयान कि "बिना लेनदेन के काम नहीं होता," पूरे सरकारी ठेकेदारी सिस्टम की पोल खोलता है। भले ही वह अभी अधिकारियों के नाम लेने से बच रहा हो, लेकिन एसवीयू अब उसकी कॉल डिटेल्स और बैंक खातों की गहन छानबीन कर रही है ताकि उन अधिकारियों तक पहुंचा जा सके जिनके संरक्षण में यह पूरा घोटाला पनपा।